भरतपुर नगर निगम चुनाव: निर्दलीय उम्मीदवारों ने मचाई धूम, भाजपा और कांग्रेस को पीछे छोड़ा

भरतपुर नगर निगम चुनाव ने सियासी समीकरणों को बदल दिया है। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 36 वार्डों में जीत हासिल की, जबकि भाजपा और कांग्रेस को क्रमशः 20 और 7 सीटें मिलीं। पूर्व महापौर और उप महापौर के रिश्तेदार भी हार गए। अब सवाल यह है कि निर्दलीय पार्षद किसके साथ खड़े होंगे। जानें चुनाव के परिणाम और उनकी राजनीतिक महत्वता।
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निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत से बदला सियासी परिदृश्य


भरतपुर में नगर निगम चुनाव के परिणामों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। 65 वार्डों वाले इस नगर निगम में निर्दलीय प्रत्याशियों ने 36 वार्डों में जीत हासिल कर भाजपा और कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया। भाजपा ने 20 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को केवल 7 सीटों पर संतोष करना पड़ा। बसपा और आरएलपी ने एक-एक वार्ड में जीत हासिल की। यह चुनाव राजनीतिक दिग्गजों के परिवारों के लिए भी निराशाजनक रहा, क्योंकि पूर्व महापौर और उप महापौर के रिश्तेदार भी हार गए। ऐसे में आने वाले समय में महापौर और उप महापौर के चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।


पूर्व महापौर की हार और परिवार की राजनीतिक स्थिति

भाजपा के मनोज सिंह ने वार्ड 19 में जीत हासिल की, जबकि पूर्व महापौर शिव सिंह भोंट को हार का सामना करना पड़ा। यह चुनाव परिणाम निगम चुनाव के सबसे चर्चित मुद्दों में से एक रहा। वार्ड 17 में उनके परिवार की राजनीतिक पकड़ दिखाई दी, जहां उनकी पत्नी विचित्रा सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की। इस प्रकार, एक ही चुनाव में परिवार को एक वार्ड में हार और दूसरे में जीत मिली।


महिला जिलाध्यक्ष की हार ने कांग्रेस को झटका दिया

वार्ड 41 में भाजपा की योगेश्वरी ने जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस की महिला जिलाध्यक्ष बबीता शर्मा को हार का सामना करना पड़ा। यह हार कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि बबीता पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थीं।


भाजपा उप महापौर की पत्नी भी हार गईं

वार्ड 18 का परिणाम भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, जहां भाजपा की मीनू सिंह को हार का सामना करना पड़ा। मीनू नगर निगम के उप महापौर गिरीश चौधरी की पत्नी हैं, जो पहले कांग्रेस में थे और बाद में भाजपा में शामिल हुए। इसके बावजूद, उनकी पत्नी चुनाव में जीत नहीं सकीं। कांग्रेस की मीनू डागुर ने उन्हें हराया, जो स्थानीय राजनीति में दल बदल के बाद बने समीकरणों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।


निर्दलीय पार्षदों की भूमिका

भरतपुर नगर निगम चुनाव के परिणामों में भाजपा को 20, कांग्रेस को 7, बसपा को 1 और आरएलपी को 1 वार्ड में जीत मिली। 36 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे। इस प्रकार, किसी भी राजनीतिक दल के पास बहुमत नहीं है। 65 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 33 पार्षदों की आवश्यकता होगी। भाजपा 20 सीटों के साथ बहुमत से 13 दूर है, जबकि कांग्रेस के पास केवल 7 सीटें हैं। दूसरी ओर, निर्दलीयों की संख्या 36 है, जो बहुमत के आंकड़े से तीन अधिक है।


निर्दलीय पार्षदों का महत्व

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 36 निर्दलीय पार्षद किसके साथ खड़े होंगे। भाजपा 20 सीटों के साथ सबसे बड़ी दलगत ताकत है, लेकिन बहुमत से काफी दूर है। कांग्रेस की स्थिति और भी कमजोर है। ऐसे में निगम की अगली सत्ता का रास्ता निर्दलीयों के बीच से होकर गुजरता दिखाई दे रहा है।


वार्ड के परिणाम

कुछ यूं रहा वार्ड का परिणाम:



  • वार्ड 1 करन सिंह, निर्दलीय

  • वार्ड 2 अम्बिका सैनी, निर्दलीय

  • वार्ड 3 आकाश निराला, निर्दलीय

  • वार्ड 4 अरविन्द, निर्दलीय

  • वार्ड 5 गजेन्द्र कुमार, कांग्रेस

  • वार्ड 6 कमलेश, निर्दलीय

  • वार्ड 7 कुंदन, निर्दलीय

  • वार्ड 8 जीतेंद्र सिंह, भाजपा

  • वार्ड 9 कमलेश, निर्दलीय

  • वार्ड 10 अमरनाथ, निर्दलीय

  • वार्ड 11 तेजराम, निर्दलीय

  • वार्ड 12 सुधा शर्मा, भाजपा

  • वार्ड 13 ओमप्रकाश, कांग्रेस

  • वार्ड 14 अर्जनसिंह, निर्दलीय

  • वार्ड 15 बरफी, निर्दलीय

  • वार्ड 16 मोतीसिंह, बसपा

  • वार्ड 17 विचित्रा सिंह, निर्दलीय

  • वार्ड 18 मीनू डागुर, कांग्रेस

  • वार्ड 19 मनोज सिंह, भाजपा

  • वार्ड 20 पूनम, निर्दलीय

  • वार्ड 21 गोपाल, आरएलपी

  • वार्ड 22 नीतू सिंह, भाजपा

  • वार्ड 23 किरन, भाजपा

  • वार्ड 24 राजेन्द्र कुमार, निर्दलीय

  • वार्ड 25 आरती, निर्दलीय

  • वार्ड 26 वीरमती, निर्दलीय

  • वार्ड 27 लोकेश, निर्दलीय

  • वार्ड 28 नीलम, भाजपा

  • वार्ड 29 राजवीर, भाजपा

  • वार्ड 30 राजकुमार, निर्दलीय

  • वार्ड 31 भास्कर, निर्दलीय

  • वार्ड 32 सुलेखा, भाजपा

  • वार्ड 33 जयप्रकाश शर्मा, निर्दलीय

  • वार्ड 34 वंदना, निर्दलीय

  • वार्ड 35 राकेश, कांग्रेस

  • वार्ड 36 किरणदेवी, निर्दलीय

  • वार्ड 37 अमरसिंह, निर्दलीय

  • वार्ड 38 धीरजकुमार, निर्दलीय

  • वार्ड 39 जगदीश, निर्दलीय

  • वार्ड 40 रीना, भाजपा

  • वार्ड 41 योगेश्वरी, भाजपा

  • वार्ड 42 रूपेंद्रसिंह, भाजपा

  • वार्ड 43 प्रेमपाल, भाजपा

  • वार्ड 44 भीमसिंह, भाजपा

  • वार्ड 45 योगिता, निर्दलीय

  • वार्ड 46 शीला, निर्दलीय

  • वार्ड 47 प्रह्लाद, निर्दलीय

  • वार्ड 48 मानवेन्द्र, निर्दलीय

  • वार्ड 49 योगेश, कांग्रेस

  • वार्ड 50 लक्ष्मी, भाजपा

  • वार्ड 51 सुशील शर्मा, भाजपा

  • वार्ड 52 रीना कुमारी, निर्दलीय

  • वार्ड 53 जयश्री, निर्दलीय

  • वार्ड 54 हरेंद्र, भाजपा

  • वार्ड 55 दयानन्द पचौरी, कांग्रेस

  • वार्ड 56 कल्पेश, निर्दलीय

  • वार्ड 57 देवेंद्रसिंह, भाजपा

  • वार्ड 58 निशा अग्रवाल, भाजपा

  • वार्ड 59 आरती, निर्दलीय

  • वार्ड 60 जितेंद्र, निर्दलीय

  • वार्ड 61, अनुराधा, भाजपा

  • वार्ड 62 जगदीशसिंह, भाजपा

  • वार्ड 63 सुनीता, निर्दलीय

  • वार्ड 64 रामेश्वरसिंह, निर्दलीय

  • वार्ड 65 जनार्दनसिंह, निर्दलीय