ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक: वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा और सहयोग की आवश्यकता
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया के तनाव पर चर्चा की गई। भारत ने ठोस प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि संवाद और कूटनीति ही स्थायी समाधान का मार्ग हैं। सम्मेलन में कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारत ने वैश्विक सहयोग को मजबूत करने पर बल दिया। यह सम्मेलन ऐसे समय में हुआ जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है।
| May 14, 2026, 18:28 IST
ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में वैश्विक अस्थिरता, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। भारत ने इस दौरान स्पष्ट किया कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।
भारत की चिंताएं और ब्रिक्स की एकजुटता
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने उद्घाटन सत्र में कहा कि दुनिया अभूतपूर्व भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना कर रही है। संघर्ष, जलवायु संकट, महामारी के बाद की चुनौतियां, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बढ़ती महंगाई ने विकासशील देशों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में ब्रिक्स देशों की एकजुटता अत्यंत महत्वपूर्ण है और समूह को केवल विचार विमर्श तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रभावी और समन्वित उत्तर तैयार करने होंगे।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता
जयशंकर ने विशेष रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष, समुद्री यातायात के लिए खतरे और ऊर्जा ढांचे में व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करना दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
संवाद और कूटनीति का महत्व
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि संवाद और कूटनीति ही किसी भी संघर्ष के स्थायी समाधान का मार्ग हैं। उन्होंने संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बुनियाद बताते हुए कहा कि भारत तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने के हर रचनात्मक प्रयास में योगदान देने के लिए तैयार है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को भी वैश्विक प्राथमिकता बताया।
सम्मेलन में भागीदारी
भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, इंडोनेशिया के सुगियोनो और दक्षिण अफ्रीका के रोनाल्ड लामोला सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की और वैश्विक सहयोग को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का प्रभाव
सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर दिखाई दे रहा है। अमेरिका की व्यापार और शुल्क संबंधी नीतियों ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की चिंताओं को बढ़ाया है। भारत ने इस पृष्ठभूमि में भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला और विविध बाजारों की आवश्यकता पर जोर दिया।
ब्रिक्स का विस्तार
ब्रिक्स समूह, जिसमें पहले ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे, अब तेजी से विस्तार कर रहा है। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी सदस्य बनेगा। आज यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।
ईरान के विदेश मंत्री की यात्रा
सम्मेलन के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की भारत यात्रा भी चर्चा का विषय रही। वह ऐसे विमान से दिल्ली पहुंचे जिस पर ‘मिनाब 168’ लिखा था, जो उस घटना का प्रतीक है जिसमें ईरान के अनुसार फरवरी में मिनाब शहर के एक स्कूल पर हमले में 168 बच्चों की मौत हुई थी। इस घटना ने पश्चिम एशिया संघर्ष के मानवीय पहलू को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
रूस के विदेश मंत्री का बयान
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत के साथ अपने देश के संबंधों को मजबूत और भरोसेमंद बताया। उन्होंने कहा कि बाहरी दबावों और अनुचित प्रतिस्पर्धा के बावजूद रूस भारत को ऊर्जा आपूर्ति संबंधी अपने सभी समझौतों का पालन करेगा।
जलवायु परिवर्तन और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार
ब्रिक्स सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, तकनीकी असमानता और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे भी उठाए गए। जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था को अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की आवश्यकता है।
भारत का संदेश
भारत ने इस सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि आज की दुनिया में सहयोग, संवाद और सुधार ही स्थिरता का आधार बन सकते हैं। ब्रिक्स देशों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
