बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला: एयरपोर्ट पर नमाज के लिए जगह देने से किया इनकार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज पढ़ने के लिए स्थान देने की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा हमेशा प्राथमिकता है और धार्मिक अधिकारों का दावा नहीं किया जा सकता जब सुरक्षा का खतरा हो। याचिका दायर करने वाले संगठन ने पहले से मौजूद शेड को फिर से बनाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया। जानें इस मामले में और क्या कहा गया।
| Mar 7, 2026, 12:57 IST
सुरक्षा को प्राथमिकता
किसी भी स्थान पर नमाज अदा करना धार्मिक अधिकार नहीं माना जा सकता जब सुरक्षा का खतरा हो। सुरक्षा हमेशा पहले आती है, चाहे धर्म कोई भी हो। मुंबई एयरपोर्ट पर विभिन्न धर्मों के लोग यात्रा करते हैं, इसलिए सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 5 मार्च को यह टिप्पणी की, जब उसने रमजान के दौरान नमाज पढ़ने के लिए स्थान देने की याचिका को खारिज कर दिया।
याचिका का विवरण
यह याचिका टैक्सी और रिक्शा ओला-उबर एसोसिएशन द्वारा दायर की गई थी। मामले की सुनवाई जस्टिस बीपी कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पुनीवाला की बेंच ने की। संगठन ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल वन के पास पहले मौजूद नमाज पढ़ने के लिए शेड को फिर से बनाया जाए। यदि यह संभव नहीं है, तो रमजान के दौरान 1500 स्क्वायर फीट का कोई अन्य स्थान प्रदान किया जाए। संगठन का कहना था कि यह अस्थाई शेड लगभग 30 वर्षों से वहां था, लेकिन अप्रैल 2025 में इसे तोड़ दिया गया। इसके बाद ड्राइवर्स को नमाज पढ़ने में कठिनाई का सामना करना पड़ा, विशेषकर रमजान के दौरान। इसलिए उन्होंने फरवरी 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि एयरपोर्ट का डोमेस्टिक टर्मिनल एक उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है, जहां अक्सर वीवीआईपी मूवमेंट होता है। इसलिए वहां किसी भी अनधिकृत ढांचे की अनुमति नहीं दी जा सकती। सरकारी वकील ज्योति चौहान ने बताया कि ड्राइवर्स के पार्किंग एरिया से पैदल दूरी पर तीन मस्जिदें हैं, जहां वे नमाज पढ़ सकते हैं। वहीं, मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के सीनियर एडवोकेट विक्रम ननकानी ने कहा कि जो शेड तोड़ा गया था, वह वीआईपी एंट्री गेट के पास था और सुरक्षा के लिहाज से खतरा बन सकता था।
कोर्ट का निर्णय
बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा धर्म से ऊपर है। जस्टिस बीपी कुलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पुनिवाला की बेंच ने कहा कि रमजान इस्लाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसके अनुयायी एयरपोर्ट के पास नमाज अदा करने का धार्मिक अधिकार नहीं रख सकते हैं। बेंच ने याचिकाकर्ताओं को बताया कि वे नमाज अदा करने का स्थान तय नहीं कर सकते। आज आप एयरपोर्ट परिसर में जगह की मांग कर रहे हैं, कल आप ओवल मैदान की जगह मांगेंगे। हालांकि, बेंच ने याचिकाकर्ताओं को एयरपोर्ट अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपने की अनुमति दी है, ताकि भविष्य में इस पर विचार किया जा सके।
पिछली सुनवाई
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एयरपोर्ट अधिकारियों को निर्देश दिया था कि क्या याचिकाकर्ताओं को कोई अन्य स्थान आवंटित किया जा सकता है। अधिकारियों ने रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि कुछ स्थान देखे गए थे, लेकिन भीड़भाड़ और सुरक्षा चिंताओं के कारण कोई उपयुक्त स्थान नहीं मिला। इस पर बेंच ने कहा कि धर्म सुरक्षा से बड़ा नहीं है। सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।
