बेल्जियम की अदालत ने मेहुल चोकसी को दी जमानत देने से किया इनकार

मेहुल चोकसी की जमानत पर अदालत का फैसला
बेल्जियम की एक अपील अदालत ने भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी को एक बार फिर जमानत देने से मना कर दिया है। चोकसी पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ऋण धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी हैं। यह निर्णय उनके प्रत्यर्पण सुनवाई से कुछ दिन पहले आया है, जो मध्य सितंबर के लिए निर्धारित है।
सीबीआई के तर्कों का प्रभाव
सूत्रों के अनुसार, अदालत ने भारत के केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के तर्कों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया, जिसमें चोकसी के विभिन्न न्यायालयों में कानूनी प्रक्रियाओं से बचने के इतिहास पर जोर दिया गया। CBI ने कहा कि यदि चोकसी को जमानत दी जाती है, तो वह भागने का खतरा पैदा कर सकते हैं।
चोकसी की गिरफ्तारी और स्वास्थ्य स्थिति
चोकसी को अप्रैल में बेल्जियम में भारतीय अधिकारियों के औपचारिक अनुरोध पर गिरफ्तार किया गया था। वह और उनके भतीजे, नीरव मोदी, PNB धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी हैं। इसके अलावा, चोकसी अन्य बैंक धोखाधड़ी मामलों में भी वांछित हैं। उनके भारतीय वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि चोकसी की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ रही है और वह कैंसर के इलाज से गुजर रहे हैं।
प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी रणनीति
दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, अग्रवाल ने प्रत्यर्पण का विरोध करने की रणनीति को दो मुख्य बिंदुओं पर रखा: मामले की राजनीतिक प्रेरणा और भारत में चोकसी के चिकित्सा उपचार पर चिंता। उन्होंने कहा कि प्रत्यर्पण से चोकसी के मानवाधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
भारतीय दंड संहिता के तहत आरोप
चोकसी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और खातों में हेराफेरी के आरोप हैं। ये अपराध बेल्जियम के कानून के तहत भी अपराध माने जाते हैं, जिससे भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध में द्वैतीय आपराधिकता की धारा लागू होती है।
अन्य कानूनी कार्रवाई
6 जून को, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बैंकों और म्यूचुअल फंडों को निर्देश दिया कि वे मेहुल चोकसी के बैंक खातों और शेयरों को अटैच करें, ताकि 2.10 करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूल की जा सके।