बीजेपी सांसद तरुण चुघ ने गुरु रविदास की 650वीं जयंती के लिए समरसता संकल्प अभियान की घोषणा की
बीजेपी सांसद तरुण चुघ ने गुरु रविदास की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में 'समरसता संकल्प अभियान' की घोषणा की है। यह अभियान 29 जुलाई, 2026 से शुरू होकर 20 फरवरी, 2027 तक चलेगा। इसमें 21,000 स्थानों पर 'कलश वंदना' कार्यक्रम और 51,000 मंदिरों में विशेष आयोजन शामिल हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस अभियान में भाग लिया और गुरु रविदास की शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर जोर दिया।
| Jul 27, 2026, 15:30 IST
गुरु रविदास की जयंती का विशेष अभियान
बीजेपी सांसद तरुण चुघ ने सोमवार को यह जानकारी दी कि उनकी पार्टी गुरु रविदास की 650वीं जयंती को 'संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी महाराज समरसता संकल्प अभियान' के तहत मनाएगी। यह अभियान 29 जुलाई, 2026 से शुरू होकर 20 फरवरी, 2027 तक चलेगा। चुघ ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह सात महीने का कार्यक्रम गुरु पूर्णिमा के दिन प्रारंभ होगा और गुरु रविदास की जयंती पर समाप्त होगा।
इस अभियान की शुरुआत 28 जुलाई को वाराणसी में गुरु रविदास की जन्मस्थली से होगी, जहां 131 कलशों की पूजा की जाएगी, जो उस स्थान की मिट्टी से भरे जाएंगे। चुघ ने कहा कि 29 जुलाई को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी का नेतृत्व इन कलशों की यात्रा को हरी झंडी दिखाएगा। यह यात्रा देश के सभी राज्यों और जिलों से गुजरेगी।
उन्होंने आगे बताया कि 29 जुलाई से 10 सितंबर के बीच देशभर में 21,000 स्थानों पर 'कलश वंदना' कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अभियान में 29 जुलाई से 51,000 मंदिरों में होने वाले कार्यक्रम भी शामिल हैं। चुघ ने कहा कि 29 जुलाई की रात को देशभर के गांवों और मंदिरों में 51,000 स्थानों पर श्री गुरु रविदास के सम्मान में दीये जलाए जाएंगे। इसके अलावा, गंगा घाट पर एक ऐतिहासिक दीपमाला कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
इससे पहले, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून में संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित 'समरसता संकल्प अभियान' की राज्य-स्तरीय कार्यशाला में भाग लिया। धामी ने संत को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गुरु रविदास की शिक्षाएं और आदर्श समाज के लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। उन्होंने कहा कि संत रविदास का जीवन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है, जिसने समाज को समानता, मानवता, सामाजिक न्याय और सद्भाव की ओर प्रेरित किया है।
