बिहार विधानसभा में पेश हुए 10 संशोधन विधेयक, प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम
बिहार विधानमंडल का मॉनसून सत्र
सोमवार को बिहार विधानमंडल के मॉनसून सत्र के पहले दिन, राज्य सरकार ने विधानसभा में 10 संशोधन विधेयक प्रस्तुत किए। इन विधेयकों के माध्यम से उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि प्रशासन, कराधान, शहरी विकास और निवेश को बढ़ावा देने वाले नियमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए जाने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य इन संशोधनों के जरिए राज्य की प्रशासनिक और राजस्व प्रणाली को मजबूत करना है।
प्रमुख विधेयकों की सूची
सदन में पेश किए गए प्रमुख विधेयकों में बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026, बिहार नर्सेज पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026, बिहार चिकित्सा (संशोधन) विधेयक-2026 और बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक-2026 शामिल हैं। इसके अलावा, बिहार भूमि दाखिल-खारिज, निबंधन अधिनियम, भारतीय स्टाम्प, बिहार जुआ (प्रतिषेध), बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, बिहार नगर विकास विधेयक और बिहार व्यापार सुगमता विधेयक-2026 भी सदन में प्रस्तुत किए गए।
भूमि प्रशासन में बदलाव
भूमि प्रशासन से संबंधित महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए, बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक-2026 में दाखिल-खारिज से जुड़ी हर याचिका, अपील और पुनरीक्षण आवेदन पर 200 रुपये का शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है। पहले केवल अदालती स्टाम्प का प्रावधान था, लेकिन अब एक निश्चित शुल्क निर्धारित किया गया है। कानून बनने के बाद, सरकार समय-समय पर इस शुल्क में संशोधन कर सकेगी।
शहरी विकास के लिए नए प्रस्ताव
बिहार में सुनियोजित शहरी विकास और ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की स्थापना के लिए, सरकार ने बिहार नगर विकास प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए बिहार नगर विकास विधेयक-2026 की प्रतियां सदस्यों को वितरित की गईं। इसके अतिरिक्त, निबंधन अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव भी है, जिसके तहत भूमि के उपयोग या श्रेणी में बदलाव से जुड़े दस्तावेजों का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
जुआ और ऑनलाइन सट्टेबाजी पर रोक
सरकार ने जुआ और ऑनलाइन सट्टेबाजी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक-2026 पेश किया है। इसमें मोबाइल फोन, कंप्यूटर या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में सट्टेबाजी से संबंधित एप्लिकेशन रखना भी अपराध माना जाएगा। सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलने वालों की बिना वारंट तलाशी और गिरफ्तारी का प्रावधान भी इस विधेयक में शामिल है। यह कानून पुराने सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 का स्थान लेगा।
नए जुआ कानून के तहत सजा
नए जुआ कानून के तहत सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं। सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलते पकड़े जाने पर दोषी को छह महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, जुआघर संचालित करने या ऑनलाइन मंच का उपयोग करने पर पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल और 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। दूसरी बार यही अपराध करने पर सजा दो से पांच साल तक की जेल और जुर्माना एक लाख रुपये तक हो सकता है।
