बिहार विधान परिषद चुनाव: नीतीश कुमार के बेटे और पवन सिंह बने एमएलसी
बिहार विधान परिषद के चुनाव परिणाम
बिहार विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव और उपचुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेटे, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, अब एमएलसी बन गए हैं।
भोजपुरी स्टार की जीत
भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह भी सदन में पहुंच गए हैं। एनडीए के 9 और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एक उम्मीदवार ने निर्विरोध चुनाव में जीत हासिल की। गुरुवार को नाम वापसी की अवधि समाप्त होने के बाद सभी को विजयी घोषित किया गया। दूसरी ओर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश एमएलसी बनने में असफल रहे। उन्हें एनडीए ने उम्मीदवार नहीं बनाया, जिससे उनका मंत्री पद संकट में आ गया है।
निर्वाचन प्रक्रिया का विवरण
बिहार विधान परिषद की विधानसभा कोटे की 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव संपन्न हो गए हैं। इसके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा खाली की गई एक सीट पर उपचुनाव भी हुआ। सोमवार को कुल 10 सीटों पर 10 उम्मीदवारों ने नामांकन किया था। इनमें से 9 सीटों पर एनडीए और विपक्ष से एक प्रत्याशी ने पर्चा भरा। सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने के कारण मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी।
जीतने वाले एमएलसी
नवनिर्वाचित एमएलसी में जदयू से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद शामिल हैं। भाजपा से भोजपुरी स्टार पवन सिंह, संजय प्रकाश मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित का नाम है। लोजपा (रामविलास) के अशरफ अंसारी और आरजेडी के सुनील सिंह भी एमएलसी चुनाव में विजयी रहे हैं।
दीपक प्रकाश का मंत्री पद संकट में
राज्यसभा सांसद और रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के एमएलसी बनने में असफलता ने उनके मंत्री पद पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वह बिना किसी सदन के सदस्य रहे दो बार बिहार सरकार में मंत्री बने हैं। उन्होंने पिछले महीने नई सम्राट सरकार के गठन के बाद दूसरी बार मंत्री पद की शपथ ली थी।
नियमों के अनुसार, मंत्री पद पर बने रहने के लिए दीपक प्रकाश को शपथ की तारीख से 6 महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद में से किसी एक सदन की सदस्यता लेनी होगी। उपेंद्र कुशवाहा को उम्मीद थी कि भाजपा के सहयोग से अपने बेटे को एमएलसी बनाकर दीपक का मंत्री पद सुरक्षित कर लेंगे। हालांकि, भाजपा ने कुशवाहा को सीट नहीं दी, जिससे दीपक एमएलसी बनने में असफल रहे। अब कुशवाहा के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
