बिहार में राज्यसभा चुनाव की तैयारी: तेजस्वी यादव का आत्मविश्वास

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल होने का दावा किया है और चुनाव में जीत का विश्वास व्यक्त किया है। इस बीच, सीटों के गणित और संभावित उम्मीदवारों की चर्चा भी जोरों पर है। क्या बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आने वाला है? जानें पूरी कहानी।
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बिहार में राज्यसभा चुनाव की तैयारी: तेजस्वी यादव का आत्मविश्वास

राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत

बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही राज्य की राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही पक्षों में बैठकों का सिलसिला जारी है। इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव सक्रियता के साथ सामने आए हैं।


तेजस्वी यादव का आत्मविश्वास

तेजस्वी यादव ने विधानसभा में अपने विधायकों और गठबंधन के सहयोगियों के साथ एक बैठक की। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या है और वे राज्यसभा चुनाव में न केवल भाग लेंगे, बल्कि जीत भी हासिल करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जल्द ही उम्मीदवारों के नाम तय किए जाएंगे। उनके इस बयान ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर 'खेला' की चर्चा को जन्म दिया है।


राज्यसभा सीटों का गणित

राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए आवश्यक आंकड़ों पर नजर डालें, तो महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल और आईआईपी) के पास कुल 35 विधायक हैं। जीत सुनिश्चित करने के लिए तेजस्वी को अभी भी 6 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए। इस स्थिति में ओवैसी की पार्टी और बसपा के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं। दूसरी ओर, मौजूदा समीकरण के अनुसार एनडीए को भी अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए 3 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता हो सकती है।


निर्विरोध चुनाव या मतदान?

यदि 5 सीटों के लिए केवल 5 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो चुनाव निर्विरोध संपन्न होगा। लेकिन अगर कोई छठा या सातवां उम्मीदवार आता है, तो मतदान होना तय है। ऐसी स्थिति में क्रॉस वोटिंग का खतरा भी बढ़ सकता है। आने वाले कुछ दिन बिहार की सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए एक परीक्षा की घड़ी साबित होंगे।