बिहार में नागरिक पंजीकरण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए कार्यशाला आयोजित
पटना में आयोजित एक कार्यशाला में बिहार में नागरिक पंजीकरण और महत्वपूर्ण सांख्यिकी प्रणाली के सुधार पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में विभिन्न अधिकारियों ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक कदमों पर विचार किया। कार्यशाला में प्रस्तुत रिपोर्ट ने प्रणाली की चुनौतियों और सुधार के सुझावों पर प्रकाश डाला। जानें इस महत्वपूर्ण पहल के बारे में अधिक जानकारी।
| Jun 15, 2026, 20:11 IST
कार्यशाला का आयोजन
बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग के अंतर्गत अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय ने संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) और संयुक्त राष्ट्र एशिया-प्रशांत आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (यूएनईएससीएपी) के सहयोग से पटना में "बिहार में नागरिक पंजीकरण एवं महत्वपूर्ण सांख्यिकी (सीआरवीएस) प्रणाली में सुधार" विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सीआरवीएस प्रणाली के सुदृढ़ीकरण के लिए मूल्यांकन, विश्लेषण और पुनर्रचना (एएआर) की प्रगति रिपोर्ट, नीति संक्षेपिका और जन-जागरूकता सामग्री का विमोचन किया गया।
मुख्य अतिथि का संबोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, बिहार सरकार के योजना एवं विकास मंत्री श्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि जन्म और मृत्यु का पंजीकरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को सरकारी सेवाओं और अधिकारों तक पहुंच सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करने और परिवारों में पंजीकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
अपर मुख्य सचिव का दृष्टिकोण
अपर मुख्य सचिव, योजना एवं विकास विभाग, डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने बताया कि सीआरवीएस प्रणाली के दो मुख्य उद्देश्य हैं— सही समय पर विश्वसनीय आंकड़ों का संकलन और उनका प्रभावी उपयोग नीति-निर्माण में करना। उन्होंने प्रवासी और वंचित परिवारों के बीच जागरूकता की कमी को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विकास आयुक्त की टिप्पणी
विकास आयुक्त, श्री मिहिर कुमार सिंह ने बताया कि राज्य में लगभग 90 प्रतिशत जन्म स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं, जिससे जन्म पंजीकरण की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने का अवसर मिला है। उन्होंने संस्थागत और गैर-संस्थागत जन्मों के पंजीकरण के लिए नियमों का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
रिपोर्ट के निष्कर्ष
कार्यशाला में प्रस्तुत एएआर रिपोर्ट ने नागरिक पंजीकरण और महत्वपूर्ण सांख्यिकी प्रणाली का व्यापक आकलन किया और सेवा वितरण, संस्थागत क्षमता, जन-जागरूकता, समन्वय और पहुंच से संबंधित चुनौतियों की पहचान की। रिपोर्ट में ऐसे सुझाव दिए गए हैं जो प्रणाली को अधिक नागरिक-केंद्रित और दक्ष बनाने के लिए हैं।
विशेषज्ञों की प्रस्तुति
यूएनईएससीएपी की सांख्यिकी विशेषज्ञ डॉ. क्लोई मर्सिडीज हार्वे और यूनिसेफ बिहार के विशेषज्ञ डॉ. अभय कुमार ने रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों और अनुशंसाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कार्यशाला में राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों और विकास सहयोगी संस्थाओं ने भाग लिया।
कार्यशाला का महत्व
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि रिपोर्ट से प्राप्त निष्कर्ष और सुझाव आगामी मानकीकृत कार्य संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के निर्माण में सहायक होंगे। इससे राज्य में सुधार संबंधी पहलों के चरणबद्ध क्रियान्वयन, सेवा वितरण में सुधार और नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण सांख्यिकीय आंकड़ों के बेहतर उपयोग का मार्ग प्रशस्त होगा। कार्यक्रम के अंत में रंजीत कुमार, निदेशक एवं मुख्य रजिस्ट्रार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। यह कार्यशाला बिहार में जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
