बिहार में धान बीज उत्पादन के लिए सहकारिता विभाग की नई पहल
बिहार में सहकारिता विभाग ने किसानों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले धान बीज उपलब्ध कराने के लिए एक नई योजना की शुरुआत की है। यह पायलट प्रोजेक्ट राज्य के छह जिलों में लागू किया जाएगा, जिसमें सहकारी संस्थाओं की भागीदारी से बीज उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने इस पहल को कृषि क्षेत्र में सहकारिता को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण कदम बताया है। योजना के सफल परिणामों के आधार पर इसे अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जा सकता है।
| Jun 19, 2026, 20:20 IST
धान बीज उत्पादन का पायलट प्रोजेक्ट
बिहार में किसानों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के लिए सहकारिता विभाग ने खरीफ वर्ष 2026-27 में पैक्सों के माध्यम से धान बीज उत्पादन का एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्णय लिया है। यह योजना राज्य के छह जिलों - रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, गया, भोजपुर और सिवान में लागू की जाएगी।
सहकारी संस्थाओं की भागीदारी
सहकारिता विभाग के निर्देशों के अनुसार, राष्ट्रीय सहकारी बीज समिति (बीबीएसएसएल) की सदस्यता प्राप्त पैक्सों को इस योजना में शामिल किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना है, साथ ही बीज उत्पादन में सहकारी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करना है। कृषि विभाग के सहयोग से बीज उत्पादन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
सहकारिता मंत्री की टिप्पणी
सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि यह पहल कृषि क्षेत्र में सहकारिता को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण है। पैक्सों को केवल धान अधिप्राप्ति तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का केंद्र बनाया जाएगा। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज मिलेंगे, जिससे उत्पादन लागत में कमी आएगी और उपज में वृद्धि होगी।
समन्वय और कार्ययोजना
सहकारिता विभाग ने संबंधित जिलों के जिला सहकारिता अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जिला कृषि अधिकारियों और भारतीय बीज सहकारी समिति के साथ समन्वय स्थापित करें ताकि समयबद्ध तरीके से बीज उत्पादन कार्य को संपादित किया जा सके। इस पहल से राज्य में सहकारी संस्थाओं की भूमिका मजबूत होगी और किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले धान बीज उपलब्ध होंगे। भविष्य में इस योजना के सफल परिणामों के आधार पर इसे अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जा सकता है।
