बिहार में धरोहर स्थलों का पुरातात्विक सर्वेक्षण, पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में प्रमुख धरोहर स्थलों के पुरातात्विक सर्वेक्षण की योजना की घोषणा की है। यह कदम इन स्थलों को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों में विकसित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। विशेषज्ञों ने कैमूर जिले में प्राचीन मंदिरों के संरक्षण की सिफारिश की है, जबकि बोधगया में महाबोधि मंदिर के आसपास खुदाई से पहले वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया है। इस पहल से बिहार की धरोहरों की पहचान मजबूत होगी और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
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मुख्यमंत्री की नई पहल

पटना, चार अगस्त: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को यह घोषणा की कि राज्य सरकार प्रमुख धरोहर स्थलों का पुरातात्विक सर्वेक्षण करवाएगी। इसका उद्देश्य इन स्थलों को 'विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों' के रूप में विकसित करना है। यह निर्णय मुख्यमंत्री की पुरातत्वविदों और धरोहर विशेषज्ञों के साथ हुई बैठक में लिया गया।


विशेषज्ञों की सिफारिशें

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, विशेषज्ञों ने कैमूर जिले में प्राचीन मुंडेश्वरी मंदिर के आसपास मौजूद हजारों प्राचीन मंदिर अवशेषों के संरक्षण और पुनर्स्थापन की सिफारिश की है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने बोधगया में महाबोधि मंदिर परिसर के आसपास खुदाई से पहले जमीन के भीतर दबे पुरातात्विक अवशेषों की पहचान के लिए 'लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग' (लिडार) और 'ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार' (जीपीआर) तकनीकों का उपयोग करने का निर्देश दिया।


केसरिया स्तूप की खुदाई

चौधरी ने केसरिया स्तूप के शेष हिस्सों की वैज्ञानिक खुदाई कराने का भी निर्देश दिया, यह कहते हुए कि यह स्तूप दुनिया के सबसे ऊंचे बौद्ध स्तूपों में से एक है और इसका एक बड़ा भाग अभी भी अन्वेषण से वंचित है।


पर्यटन विकास की योजना

अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार इन स्थलों के संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करेगी। इससे बिहार की वैश्विक धरोहरों की पहचान मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। बैठक में कैमूर के प्रागैतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों, जैसे तेलहर कुंड और करकटगढ़ को धरोहर एवं पारिस्थितिकी पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने पर भी चर्चा की गई।


बैठक में शामिल विशेषज्ञ

इस बैठक में पद्मश्री से सम्मानित पुरातत्वविद् के.के. मोहम्मद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारी और 'बिहार हेरिटेज डेवलपमेंट सोसाइटी' के प्रतिनिधि भी शामिल थे।