बिहार में जलछाजन विकास योजना की समीक्षा: कृषि मंत्री ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश
जलछाजन विकास घटक की समीक्षा
बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा और कृषि विभाग के प्रधान सचिव ने आज जलछाजन विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC-PMKSY 2.0) की प्रगति की गहन समीक्षा की। इस बैठक में योजना के प्रभावी कार्यान्वयन, उपलब्ध निधियों के समय पर उपयोग और किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे किसानों की आवश्यकताओं और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्ययोजनाएं तैयार करें और सिंचाई तथा जल संरक्षण से संबंधित योजनाओं का लाभ समय पर किसानों तक पहुंचाएं।
कृषि क्षेत्र की भूमिका
मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं प्रदान करना और जलछाजन विकास के माध्यम से कृषि उत्पादन में वृद्धि करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीज वितरण से संबंधित सभी कार्य समय पर पूरे किए जाएं ताकि किसानों को बुआई के मौसम में किसी भी कठिनाई का सामना न करना पड़े।
योजना की प्रगति
बैठक में निदेशक, भूमि संरक्षण-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने योजना की प्रगति की जानकारी दी। बताया गया कि जलछाजन विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC-PMKSY 2.0) वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक स्वीकृत थी, जिसे भारत सरकार ने सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार ने 19.85 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई है।
स्वीकृति की प्रक्रिया
अधिकारियों ने बताया कि इस राशि के उपयोग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना को स्टेट लेवल सैंक्शनिंग कमेटी (SLSC) से स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक है। इस संबंध में 7 मई 2026 को विकास आयुक्त की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन स्वीकृति संबंधी निर्णय अभी लंबित है। स्वीकृति मिलने के बाद ही योजना के अंतर्गत विभिन्न कार्यों का निष्पादन संभव होगा।
जलछाजन विकास योजना का महत्व
बैठक में यह भी बताया गया कि भारत सरकार द्वारा दी गई राशि के शीघ्र उपयोग पर जोर दिया जा रहा है, ताकि योजना की राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय प्रगति प्रभावित न हो। इस पर मंत्री और प्रधान सचिव ने अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया। कृषि मंत्री ने कहा कि जलछाजन विकास योजना कृषि विभाग की एक महत्वपूर्ण योजना है, जो जल एवं भूमि संरक्षण, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक संसाधनों के विकास, आजीविका संवर्धन और क्षमता निर्माण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है।
कृषि अभियंताओं की भूमिका
समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य में 72 कृषि अभियंता, 38 सहायक निदेशक और 46 प्रखंड भूमि संरक्षण पदाधिकारी कार्यरत हैं। ये अधिकारी भूमि एवं जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण, उत्पादन प्रणाली को मजबूत करने और किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं। अंत में, मंत्री ने जलछाजन विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC-PMKSY 3.0) की स्वीकृति और भविष्य के कार्यान्वयन की तैयारियों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
