बिहार में NH-22 और रेलवे परियोजनाओं के लिए केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी
केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
केंद्र सरकार ने बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने बिहार में NH-22 के 82.6 किलोमीटर लंबे खंड को 4-लेन में अपग्रेड करने की स्वीकृति दी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 3,590.73 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, कैबिनेट ने चार रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं के लिए 9,450 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी है।
NH-22 के चौड़ीकरण से बेहतर कनेक्टिविटी
बिहार में स्वीकृत हाईवे परियोजना के अंतर्गत मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को 4-लेन मानकों के अनुसार विकसित किया जाएगा। यह 82.6 किलोमीटर लंबा खंड है और इसकी लागत 3,590.73 करोड़ रुपये है।
इस सड़क के चौड़ीकरण से उत्तर बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के बीच आवागमन में सुधार की उम्मीद है। साथ ही, नेपाल सीमा की ओर जाने वाली कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलेगी। बेहतर सड़क नेटवर्क यात्रियों और माल ढुलाई दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
रेल नेटवर्क को मिलेगा नया जीवन
कैबिनेट ने चार रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर कुल मिलाकर 9,450 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनका मुख्य उद्देश्य रेलवे नेटवर्क की क्षमता को बढ़ाना, भीड़ को कम करना और यात्री तथा माल परिवहन को सुगम बनाना है।
इन परियोजनाओं में हावड़ा-चेन्नई मुख्य रेल मार्ग के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को अतिरिक्त लाइनों से मजबूत करने वाली योजनाएं शामिल हैं, जैसे कि खड़गपुर-भद्रक चौथी लाइन और भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन।
माल ढुलाई की क्षमता में वृद्धि
रेल परियोजनाओं से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में भी वृद्धि होने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, इन परियोजनाओं से लगभग 13 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता जुड़ सकती है। इससे प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्रों के बीच सामान की आवाजाही में तेजी आएगी।
कुल लागत 13 हजार करोड़ से अधिक
कैबिनेट के निर्णय के तहत स्वीकृत इन पांच प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत लगभग 13,041 करोड़ रुपये है। इसमें बिहार का हाईवे प्रोजेक्ट 3,591 करोड़ रुपये और चार रेलवे परियोजनाएं 9,450 करोड़ रुपये की हैं।
कुल मिलाकर, बिहार के लिए NH-22 का 4-लेन विस्तार सड़क संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जबकि रेलवे की मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं देश के प्रमुख रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने में सहायक होंगी। सरकार का ध्यान सड़क और रेल दोनों माध्यमों में इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता बढ़ाकर यात्री सुविधा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर है।
