बिहार की राजनीति में उठापटक: नीतीश की यात्रा और तेजस्वी की बैठक
बिहार की राजनीतिक गतिविधियाँ
शुक्रवार को बिहार की राजनीति में दिलचस्प घटनाएँ देखने को मिलीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी 'समृद्धि यात्रा' की शुरुआत की, जबकि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने अपने आधिकारिक निवास पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की कोर कमेटी की बैठक आयोजित की। इस राजनीतिक उठापटक के बीच, आरजेडी और लालू प्रसाद परिवार से अलग हो चुकी रोहिणी आचार्य ने बिना किसी का नाम लिए, एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पार्टी नेतृत्व की कड़ी आलोचना की। उन्होंने विपक्षी नेताओं की बैठक को दिखावा करार दिया और नेताओं से आत्मचिंतन और जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
रोहिणी आचार्य की तीखी टिप्पणी
रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में कहा कि समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है 'खुद' आत्म-चिंतन करना और जिम्मेदारी लेना। उन्होंने यह भी कहा कि 'अपने' इर्द-गिर्द बैठे चिन्हित 'गिद्धों' को हटाने का साहस दिखाने के बाद ही किसी भी प्रकार की समीक्षा का महत्व साबित होगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक कड़े शब्दों वाले पोस्ट में लिखा कि किसी 'महान विरासत' को नष्ट करने के लिए बाहरी लोगों की आवश्यकता नहीं होती, अपने ही लोग काफी होते हैं।
आचार्य की चेतावनी
आचार्य ने कहा कि जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है और अहंकार सिर पर चढ़ जाता है, तब 'विनाशक' ही बुद्धि और विवेक को छीन लेते हैं। यह विवाद तब सामने आया जब आरजेडी को चुनावी क्षेत्र में करारी हार का सामना करना पड़ा। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने भारी बहुमत से जीत हासिल की, जबकि आरजेडी ने 140 से अधिक सीटों में से केवल 25 सीटें जीतीं। भाजपा और जेडीयू को क्रमशः 89 और 85 सीटें मिलीं, और एनडीए गठबंधन ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया।
