बिलासपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पत्नी का शारीरिक संबंध से इनकार क्रूरता माना गया

बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पत्नी का पति से शारीरिक संबंध बनाने से इनकार क्रूरता के समान है। यह मामला एक महिला द्वारा अपने पति को नापसंद करने और शारीरिक संबंध से मना करने से जुड़ा है। कोर्ट ने इस निर्णय को तलाक से संबंधित मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टांत माना है। जानें इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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बिलासपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पत्नी का शारीरिक संबंध से इनकार क्रूरता माना गया gyanhigyan

बिलासपुर हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

बिलासपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पत्नी का शारीरिक संबंध से इनकार क्रूरता माना गया


शैलेंद्र सिंह ठाकुर/बिलासपुर: बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने पति-पत्नी के संबंधों से जुड़े एक मामले में कहा कि यदि पत्नी अपने पति से शारीरिक संबंध बनाने से मना करती है, तो इसे क्रूरता के रूप में माना जाएगा। एक महिला ने अपने पति को नापसंद करते हुए, उसे मोटा कहकर पिछले दस वर्षों से शारीरिक संबंध बनाने से मना किया। परेशान पति ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में अपील की, जहां जस्टिस पी सैम कोशी और जस्टिस पीपी साहू की बेंच ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।


जानकारी के अनुसार, बिलासपुर के विकास नगर निवासी एन मिश्रा की शादी 25 नवंबर 2007 को हुई थी। उनकी पत्नी अब बेमेतरा में रहती हैं, और तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत किया गया था। दायर परिवाद में उल्लेख किया गया कि शादी के कुछ महीनों बाद उनकी पत्नी ससुराल छोड़कर मायके चली गई।


बिना सूचना नौकरी शुरू की
एन मिश्रा की पत्नी ने 2011 में पति और ससुराल वालों को बताए बिना बेमेतरा में शिक्षाकर्मी की नौकरी ज्वॉइन कर ली। जब पति ने उसे घर आने के लिए कहा, तो वह उल्टा पति पर बेमेतरा में रहने का दबाव बनाने लगी। इस स्थिति से परेशान होकर पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी।


फैमिली कोर्ट ने याचिका खारिज की
पति ने तलाक के लिए आवेदन किया था, जिसे फैमिली कोर्ट ने 13 दिसंबर 2017 को खारिज कर दिया। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान पत्नी ने अपने बचाव में तर्क प्रस्तुत किए। कोर्ट ने पाया कि दंपती के बीच 2010 से कोई शारीरिक संबंध नहीं था। पत्नी ने पति को मोटा और भद्दा कहकर नापसंद किया और बिना बताए नौकरी ज्वॉइन की, जिसमें उसने अपने मायकेवालों को नॉमिनी बनाया।



कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि अगस्त 2010 से पति-पत्नी के बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं रहा। पति या पत्नी के साथ शारीरिक संबंध से इनकार करना क्रूरता के समान है। विवाहित जीवन के लिए शारीरिक संबंध आवश्यक होते हैं। कोर्ट ने माना कि इस मामले में पत्नी ने पति के प्रति क्रूरता का व्यवहार किया है।


बिलासपुर हाईकोर्ट का यह आदेश तलाक से संबंधित अन्य मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टांत के रूप में लिया जाएगा। इस फैसले के आधार पर भविष्य में भी पति-पत्नी के संबंधों के आधार पर तलाक से संबंधित मामलों में आदेश जारी किए जा सकेंगे।