बालिका शिक्षा और अधिकारों पर कार्यशाला का आयोजन

चूरू में अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस सप्ताह के अंतर्गत एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें बालिका शिक्षा, अधिकारों और कानूनी प्रावधानों पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में विभिन्न अधिकारियों ने बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया और आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर दिया। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की। जानें इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के बारे में और कैसे यह बालिकाओं के विकास में सहायक है।
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बालिका दिवस सप्ताह के अंतर्गत कार्यशाला


चूरू। जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा के मार्गदर्शन में बुधवार को जिला परिषद सभागार में महिला अधिकारिता विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस सप्ताह के तहत एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बाल अधिकारिता सहायक निदेशक सत्येंद्र पाल वीर, महिला अधिकारिता सहायक निदेशक राजेंद्र शेखावत, जनसंपर्क अधिकारी सूर्यकान्त कुमावत, संरक्षण अधिकारी पन्ने सिंह, सुपरवाइजर कृष्णा, मधुर स्पेशल विद्यालय की अंजू नेहरा, अणुव्रत समिति की रचना कोठारी, उद्यमी सरला, योग प्रशिक्षक सुनीता और बालिका उत्थान से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में अधिकारियों ने बालिका शिक्षा, उनके अधिकारों और कानूनी प्रावधानों पर विस्तृत जानकारी साझा की।


इस कार्यशाला में बालिकाओं को शिक्षा, अधिकारों, कानूनी प्रावधानों, व्यक्तित्व विकास, स्वास्थ्य, स्वरोजगार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया गया।


बाल अधिकारिता सहायक निदेशक सत्येंद्र पाल वीर ने कहा कि बालिका शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का साधन नहीं है, बल्कि यह एक सशक्त और प्रगतिशील समाज के निर्माण की नींव है। शिक्षित बालिकाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग रहकर परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हमें बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर प्रदान करना, उन्हें सुरक्षित वातावरण देना और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना चाहिए।


जनसंपर्क अधिकारी सूर्यकान्त कुमावत ने बताया कि संवाद कौशल व्यक्तित्व विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी भी करियर में सफलता के लिए प्रभावी संवाद क्षमता आवश्यक है। उन्होंने बालिकाओं को अपने विचारों और भावनाओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने और संवाद कौशल को बेहतर बनाने के लिए नियमित अभ्यास करने की सलाह दी।


महिला अधिकारिता सहायक निदेशक राजेंद्र शेखावत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की और बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के महत्व पर जोर दिया।


संरक्षण अधिकारी पन्ने सिंह ने बाल विवाह, बाल श्रम और घरेलू हिंसा जैसी सामाजिक कुरीतियों की रोकथाम के लिए बालिकाओं के अधिकारों और उनसे संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और किसी भी प्रकार के अन्याय या शोषण की स्थिति में उचित सहायता लेने के लिए जागरूक किया।


योग प्रशिक्षक सुनीता ने योग और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी। उद्यमी सरला ने उद्यमिता और बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूक किया। अंजू नेहरा ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ जिम्मेदार नागरिक बनने और अपने सपनों को साकार करने के लिए मेहनत करने का संदेश दिया। राजीविका से अयूब अली और मुकेश महर्षि ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी दी। तीरंदाज दृष्टि और हर्षिता कंवर ने भी अपने अनुभव साझा किए।


इस दौरान सुपरवाइजर प्रीति, मंजू, सखी सेंटर से नीरज, सुमन, शारदा, अंजना गुप्ता, भूपेंद्र सिंह, विक्रम सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।