बागपत में 27 साल पुराने मुकदमे का अनोखा फैसला

बागपत में एक 27 साल पुराने मुकदमे का अद्वितीय फैसला सुनाया गया है, जिसमें आरोपी राजेंद्र ने अदालत में आत्मसमर्पण किया और अपने अपराध को स्वीकार किया। अदालत ने उसे सजा और अर्थदंड दिया, जिसमें उसकी वृद्धावस्था और बीमारी को ध्यान में रखा गया। जानें इस मामले की पूरी कहानी और अदालत के निर्णय के पीछे की वजहें।
 | 
बागपत में 27 साल पुराने मुकदमे का अनोखा फैसला gyanhigyan

मुकदमे का इतिहास

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के सरूरपुर कलां गांव के निवासी धारा सिंह ने 26 जून 1999 को अपने गांव के राजेंद्र सहित तीन व्यक्तियों के खिलाफ गालीगलौज और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज कराया था। मामले की सुनवाई में देरी के चलते अदालत ने कुर्की वारंट जारी किया। हाल ही में, आरोपी राजेंद्र ने अदालत में आत्मसमर्पण कर लिया और अपने अपराध को स्वीकार किया, साथ ही कम से कम अर्थदंड की मांग की।


अदालत का निर्णय

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीन्द्रपाल सिंह की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद राजेंद्र को न्यायालय में उपस्थित रहने तक की सजा और 1,000 रुपये का अर्थदंड लगाया। इसमें गालीगलौज के लिए 300 रुपये और धमकी देने के लिए 700 रुपये का अर्थदंड शामिल था। यदि वह अर्थदंड का भुगतान नहीं करता, तो उसे 10 दिन की जेल की सजा भुगतनी पड़ती।


आरोपी की स्थिति

आत्मसमर्पण के दौरान, राजेंद्र ने अदालत को बताया कि वह एक गरीब परिवार से है, वृद्ध और बीमार है, और चलने-फिरने में असमर्थ है। उसने अदालत से अनुरोध किया कि उसे कम से कम अर्थदंड देकर मामले का निपटारा किया जाए।


मुकदमे की प्रक्रिया

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। राजेंद्र का मामला लंबे समय तक विचाराधीन रहा, जिसके कारण गैरजमानती वारंट और मकान की कुर्की नोटिस जारी की गई थी।


सजा के बाद की स्थिति

अर्थदंड और सजा पूरी करने के बाद, बुजुर्ग आरोपी अपने घर लौट गया। अभियोजन अधिकारी अभिराम गौतम ने इस मामले की पुष्टि की।