बसव जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी का श्रद्धांजलि और बसवेश्वर के विचार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बसव जयंती के अवसर पर जगद्गुरु बसवेश्वर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बसवेश्वर के विचारों को साझा करते हुए कहा कि उनके सिद्धांत समाज को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण हैं। बसव जयंती, 12वीं सदी के महान समाज सुधारक बसवेश्वर के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। इस अवसर पर बसवेश्वर के योगदान, जैसे जातिविहीन समाज की स्थापना, अनुभव मंटप की स्थापना, और महिला सशक्तिकरण पर चर्चा की गई। जानें उनके विचारों का महत्व और समाज पर उनका प्रभाव।
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बसव जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी का श्रद्धांजलि और बसवेश्वर के विचार gyanhigyan

प्रधानमंत्री मोदी ने बसव जयंती पर दी श्रद्धांजलि

सोमवार को बसव जयंती के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जगद्गुरु बसवेश्वर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बसवेश्वर का दृष्टिकोण एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना और लोगों को सशक्त बनाने के लिए प्रेरणादायक है। मोदी ने अपने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, 'बसव जयंती के इस खास मौके पर, मैं जगद्गुरु बसवेश्वर और उनके उपदेशों को नमन करता हूँ। उनका सपना और जनसशक्तीकरण के लिए उनके प्रयास हमें हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।'


बसवेश्वर, जिन्हें बसवन्ना के नाम से भी जाना जाता है, 12वीं शताब्दी के एक प्रमुख कवि-दार्शनिक और लिंगायत संप्रदाय के संस्थापक थे।


बसव जयंती का महत्व

बसव जयंती, महान समाज सुधारक, दार्शनिक और कवि महात्मा बसवेश्वर के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। यह त्योहार विशेष रूप से कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।


बसवेश्वर के विचार और उनके योगदान

बसव जयंती मनाने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण और विचार हैं।


जातिविहीन समाज की स्थापना


बसवन्ना ने जाति व्यवस्था, छुआछूत और ऊंच-नीच के भेदभाव का विरोध किया। उन्होंने 'मानव धर्म' को सर्वोपरि मानते हुए सिखाया कि जन्म के आधार पर कोई बड़ा या छोटा नहीं होता।


अनुभव मंटप की स्थापना


उन्होंने 'अनुभव मंटप' की स्थापना की, जिसे दुनिया की पहली लोकतांत्रिक संसद माना जाता है। यहाँ सभी वर्गों के लोग आध्यात्मिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करते थे।


कायका वे कैलास का सिद्धांत


बसवन्ना का प्रसिद्ध सिद्धांत 'कायका वे कैलास' था, जिसका अर्थ है कि ईमानदारी से किया गया परिश्रम स्वर्ग के समान है। उन्होंने श्रम की गरिमा को बढ़ावा दिया।


महिला सशक्तिकरण


उन्होंने 12वीं सदी में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने की वकालत की और उन्हें शिक्षित होने के लिए प्रेरित किया।


वचन साहित्य के माध्यम से शिक्षा


बसवेश्वर ने जटिल धार्मिक ग्रंथों के बजाय आम लोगों की भाषा में छोटे 'वचन' लिखे, ताकि सभी लोग नैतिक और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सकें।