बवासीर: कारण, प्रकार और घरेलू उपचार
बवासीर, जिसे अर्श भी कहा जाता है, एक आम समस्या है जो कब्ज के कारण होती है। यह बीमारी खूनी और वादी बवासीर के रूप में प्रकट होती है। इसके कई प्रकार और लक्षण होते हैं, जैसे मलद्वार पर मस्से निकलना और खून आना। इस लेख में, हम बवासीर के कारण, प्रकार और प्रभावी घरेलू उपचारों के बारे में चर्चा करेंगे। जानें कैसे आप इस समस्या से राहत पा सकते हैं।
| Jun 2, 2026, 21:20 IST
बवासीर की जानकारी
बवासीर, जिसे अर्श भी कहा जाता है, एक ऐसी बीमारी है जिसका मुख्य कारण कब्ज होता है। जब व्यक्ति अधिक मिर्च-मसाले और बाहर के खाने का सेवन करता है, तो पेट में कब्ज उत्पन्न होती है, जिससे मल सूखा और कठोर हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप, मल करते समय अधिक जोर लगाना पड़ता है, जिससे बवासीर का रोग विकसित होता है। बवासीर के दो प्रमुख प्रकार हैं: खूनी बवासीर और वादी बवासीर। खूनी बवासीर में मल के साथ खून आता है, जबकि वादी बवासीर में मलद्वार पर सूजन होती है, लेकिन खून नहीं आता। बवासीर के रोग में मांसांकुर (मस्से) निकल आते हैं, जिससे रोगी को अत्यधिक पीड़ा होती है।
बवासीर के प्रकार
अर्श (बवासीर) के 6 प्रकार होते हैं:
- कफार्श: इसमें मस्से गहरे होते हैं और थोड़ी पीड़ा, चिकनाहट, गोलाई, कफयुक्त पीव और खुजली होती है।
- वातजन्य बवासीर: इसमें गुदा में ठंडे, चिपचिपे और काले मस्से निकलते हैं।
- संसगर्श: यह परंपरागत या दूसरों के संपर्क से होता है।
- पितार्श: इसमें मस्सों का रंग नीला, पीला, काला और लाल होता है।
- सन्निपात: इसमें वातार्श, पितार्श और कफार्श के लक्षण मिलते हैं।
- खूनी बवासीर: इसमें मस्से चिरमिठी या मूंग के आकार के होते हैं और खून निकलता है।
बवासीर के कारण
बवासीर के मुख्य कारण:
- अधिक तेल-मिर्च और मसालेदार खाद्य पदार्थों का सेवन, जिससे पाचन क्रिया प्रभावित होती है।
- कब्ज के कारण मलद्वार में जख्म या मस्से बन जाते हैं।
- आहार में लापरवाही और चिकित्सा में देरी से रोग बढ़ता है।
बवासीर के लक्षण
बवासीर के लक्षण:
- मलद्वार के बाहर मांसांकुर निकलना।
- शौच के साथ खून निकलना।
- चलने-फिरने में परेशानी और सिर में चक्कर आना।
बवासीर के घरेलू उपाय
बवासीर के लिए कुछ प्रभावी घरेलू उपाय:
- हारसिंगार: 2 ग्राम हारसिंगार के फूलों को 30 ग्राम पानी में भिगोकर सुबह मसलकर खाएं।
- कपूर: कपूर, रसोत, चाकसू और नीम के फूल को मिलाकर गोलियां बनाएं।
- वनगोभी: वनगोभी के पत्तों का रस बवासीर के मस्सों पर लगाएं।
- मूली: मूली का रस और जलेबी मिलाकर सेवन करें।
- रीठा: रीठा के छिलके को जलाकर भस्म बनाएं और शहद के साथ लें।
