बलिया में पुलिस की पिटाई से व्यक्ति की मौत, छह लोगों पर मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक 42 वर्षीय व्यक्ति की मौत पुलिस की कथित पिटाई के कारण हुई है। इस घटना के बाद पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ग्रामीणों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया। घटना की जांच जारी है। जानें पूरी कहानी और इसके पीछे की सच्चाई।
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पुलिस की कथित पिटाई से हुई मौत

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक दुखद घटना सामने आई है, जिसमें एक 42 वर्षीय व्यक्ति की मौत पुलिस की कथित पिटाई के कारण हुई। इस मामले में पुलिस ने रविवार को एक दारोगा, एक आरक्षी और ग्राम प्रधान सहित कुल छह व्यक्तियों के खिलाफ हत्या और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। बैरिया क्षेत्र के पुलिस क्षेत्राधिकारी आलोक गुप्ता ने इस घटना की पुष्टि की है.


शिकायत के आधार पर कार्रवाई

सीओ आलोक गुप्ता ने बताया कि रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट गांव के निवासी विशाल गोंड की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। पुलिस ने दारोगा सचिन सरोज, आरक्षी अंकित सिंह, ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह, सूरज कन्नौजिया, उसके एक रिश्तेदार और मनीष यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं में एफआईआर दर्ज की है.


घटना का विवरण

शिकायत के अनुसार, यह विवाद सात जुलाई की शाम को शुरू हुआ। विशाल गोंड मांस खरीदने के लिए खेदन चौराहे पर सूरज की दुकान पर गए थे, जहां दोनों के बीच किसी बात पर बहस हो गई। आरोप है कि बहस के बाद सूरज के रिश्तेदारों ने विशाल पर लाठी-डंडों से हमला करने की कोशिश की, लेकिन वह वहां से भागने में सफल रहे.


पुलिस की कार्रवाई

इसके बाद ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह अपने चालक मनीष यादव के साथ विशाल को थाने ले गए और उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। अगले दिन, आठ जुलाई को पुलिस उपनिरीक्षक सचिन सरोज और कांस्टेबल अंकित सिंह विशाल के घर पहुंचे और उसके पिता कामजी गोंड को थाने ले गए.


पिता की पिटाई और गंभीर स्थिति

विशाल का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने ग्राम प्रधान के दबाव में आकर कामजी गोंड की थाने में बेरहमी से पिटाई की। इसके बाद, ग्राम प्रधान और उनका चालक कामजी को एक ईंट-भट्ठे पर ले गए, जहां भी उनके साथ मारपीट की गई और बाद में उन्हें एक बगीचे में अधमरी हालत में फेंक दिया गया.


परिवार की मदद और अस्पताल में भर्ती

गांव के बच्चों ने कामजी को बेहोश पड़े देखा और उनके परिवार को सूचित किया। परिजन उन्हें रेवती के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया। बाद में, उन्हें वाराणसी के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां 10 जुलाई की रात उनका निधन हो गया.


ग्रामीणों का आक्रोश

रविवार सुबह जब कामजी गोंड का शव वाराणसी से उनके गांव गायघाट पहुंचा, तो ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर खेदू चौराहे पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। सीओ आलोक गुप्ता ने ग्रामीणों को आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.