बरेली में फर्जी IAS की ठगी का मामला: करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा
बरेली में फर्जी IAS की कहानी
Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली में एक फर्जी IAS अधिकारी विप्रा शर्मा द्वारा सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। विप्रा शर्मा, जो खुद को एडीएम बताती थी, और उसका परिवार बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर उनकी मेहनत की कमाई हड़पता रहा। इस मामले में अब तक 22 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, और कई अन्य पीड़ित भी सामने आए हैं। दिलचस्प बात यह है कि विप्रा की बहन भी फर्जी IAS थी, जबकि उसका भाई PCS अधिकारी बनकर ठगी करता था। वर्तमान में, भाई और पिता फरार हैं।
बारादरी थाना क्षेत्र के ग्रेटर ग्रीन पार्क कॉलोनी में स्थित विप्रा का आलीशान घर अब सूना पड़ा है। यह दो मंजिला कोठी लगभग 2000 स्क्वायर फीट में फैली हुई है, जहां विप्रा अपने परिवार के साथ रहती थी। पुलिस कार्रवाई के बाद घर पर ताला लटका हुआ है और कॉलोनी में इस परिवार की चर्चा हो रही है।
जब मीडिया की टीम ने पड़ोसियों से बात की, तो पता चला कि विप्रा खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों पर रौब झाड़ती थी। उसकी गाड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार और एडीएम का नाम लिखा होता था। वहीं, उसका ममेरा भाई अंकित शर्मा खुद को PCS अधिकारी बताता था। दोनों भाई-बहन सरकारी रसूख का डर दिखाकर लोगों को भरोसे में लेते थे और नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये वसूलते थे।
आलीशान कोठी में ठगी की काली कमाई का संकेत
ग्रेटर ग्रीन पार्क में स्थित इस कोठी को देखकर कोई भी समझ सकता था कि यहां किसी बड़े अधिकारी का परिवार रहता है। घर में इटैलियन मार्बल, रॉयल टेक्सचर और मखमली फिनिश का काम किया गया था। हॉल में बड़े-बड़े क्रिस्टल झूमर और ड्राइंग रूम में महंगे फर्नीचर थे। कोठी का मॉड्यूलर किचन भी अत्याधुनिक था।
पड़ोसियों के अनुसार, घर के बाहर अक्सर लग्जरी गाड़ियां खड़ी रहती थीं। कॉलोनी में आने-जाने वाले लोग इस घर की भव्यता देखकर प्रभावित होते थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि इसी आलीशान कोठी के अंदर बेरोजगार युवाओं को ठगने का खेल चल रहा है।
हैरानी की बात यह है कि इस गैंग ने गरीब लोगों को भी नहीं छोड़ा। कॉलोनी में काम करने वाली एक महिला और कुल्फी बेचने वाले युवक से भी नौकरी दिलाने के नाम पर पांच-पांच लाख रुपये ठग लिए गए। पड़ोसियों का कहना है कि परिवार पिछले करीब 20 साल से यहां रह रहा था।
कॉलोनी में रहने वाले एक रिटायर्ड अधिकारी ने बताया कि अगर सच में विप्रा का चयन IAS में हुआ होता तो पूरी कॉलोनी को इसकी जानकारी होती।
महंगे कपड़ों और ज्वेलरी का शौक
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि विप्रा को महंगे और ब्रांडेड कपड़ों का शौक था। उसके पास जरा, लेविस, ओनली, मैंगो जैसे ब्रांड्स के कपड़े मिले हैं। एथनिक वियर में वह बीबा और रितु कुमार जैसे महंगे डिजाइनर पहनती थी।
विप्रा के पास करीब 70 जोड़ी महंगी सैंडल और जूतियां भी मिली हैं। इसके अलावा, उसके पास सोने-हीरे के गहनों का बड़ा कलेक्शन भी मिला है। पुलिस को शक है कि ठगी के पैसों से ही यह पूरी लग्जरी लाइफस्टाइल तैयार की गई थी।
नीली बत्ती वाली गाड़ी का इस्तेमाल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि इस गैंग ने 2022 से ठगी का जाल फैलाना शुरू किया था। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से मोटी रकम ली जाती थी। नीली बत्ती वाली गाड़ी और सरकारी रुतबे का इस्तेमाल कर लोगों को भरोसे में लिया जाता था।
पुलिस ने 26 अप्रैल को विप्रा शर्मा, उसकी बहन शिखा शर्मा और ममेरी बहन दीक्षा पाठक को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि, पिता और ममेरा भाई अब भी फरार हैं।
पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान साढ़े चार लाख रुपये नकद, दो लैपटॉप, तीन पासबुक, दस चेकबुक, चार मोबाइल फोन और दो आईफोन बरामद किए थे। इसके अलावा, अलग-अलग खातों में जमा करीब 55 लाख रुपये भी फ्रीज कराए गए हैं।
फिलहाल, पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। आशंका है कि ठगी का शिकार हुए लोगों की संख्या और बढ़ सकती है।
