बदायूं में नर्सिंग होम की लापरवाही से नवजात की मौत, मां से पैसे की मांग
बदायूं में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही ने एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। कादरचौक स्थित राधिका नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान एक महिला कर्मचारी ने प्रसूता के सीने पर बैठकर उसके पेट को दबाने का कार्य किया, जिसके परिणामस्वरूप नवजात शिशु की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
यह घटना कादरचौक थाना क्षेत्र के ललसी नगला गांव की है। गांव के निवासी छोटेलाल ने अपनी पत्नी कृष्णा को रविवार सुबह प्रसव पीड़ा के चलते 108 एम्बुलेंस से कादरचौक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। आरोप है कि वहां तैनात एएनएम शशिलता और दाई बबीता ने सरकारी अस्पताल में इलाज करने के बजाय, एमओआईसी डॉ. अवधेश राठौर के साथ मिलकर प्रसूता को राधिका नर्सिंग होम भेज दिया। यह निजी नर्सिंग होम दरअसल एमओआईसी की बहन मोनिका राठौर द्वारा संचालित किया जाता है।
नवजात की मौत और पैसे की मांग
नर्सिंग होम पहुंचने पर परिजनों से कथित तौर पर 15 हजार रुपये जमा करने के लिए कहा गया। जब प्रसव की प्रक्रिया शुरू हुई, तो वहां मौजूद स्टाफ ने अमानवीयता की सारी सीमाएं पार कर दीं। परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के दौरान एक महिला कर्मचारी प्रसूता के सीने पर बैठ गई और जोर से उसका पेट दबाने लगी, जिससे नवजात ने जन्म लेते ही दम तोड़ दिया।
जब नवजात की मृत्यु की सूचना परिजनों को मिली, तो वहां हंगामा मच गया। विरोध करने पर आरोप है कि नर्सिंग होम के स्टाफ ने परिजनों को धमकाया और कहा कि जब तक पूरे पैसे नहीं दिए जाएंगे, तब तक न तो प्रसूता को जाने दिया जाएगा और न ही नवजात का शव सौंपा जाएगा। इस संवेदनहीनता पर गुस्साए परिजनों ने नर्सिंग होम के बाहर भारी हंगामा किया।
प्रशासनिक कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम और सीओ भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। जिलाधिकारी ने तुरंत एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, जिसमें एसडीएम सदर, सीओ उझानी और एमओआईसी शामिल हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि नर्सिंग होम पंजीकृत था, लेकिन वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था और मानकों की अनदेखी की जा रही थी। कार्रवाई के तहत कादरचौक सीएचसी के प्रभारी डॉ. अवधेश राठौर को तुरंत हटा दिया गया है। राधिका नर्सिंग होम को सील करने और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। नवजात के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और प्रसूता को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच चल रहे कमीशन के खेल को एक बार फिर उजागर करती है।
