बंबई उच्च न्यायालय ने गणपति उत्सव के लिए पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों पर महाराष्ट्र सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

बंबई उच्च न्यायालय ने गणपति उत्सव के दौरान पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों के उपयोग को लेकर महाराष्ट्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। प्रधानमंत्री मोदी की अपील के संदर्भ में, अदालत ने राज्य सरकार से जवाब देने के लिए समय दिया है। सीपीसीबी के दिशानिर्देशों के अनुसार, पीओपी की मूर्तियों पर रोक लगाई गई है, लेकिन मूर्तियों के निर्माताओं ने अपने व्यापार के अधिकारों की रक्षा के लिए याचिकाएं दायर की हैं।
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गणपति उत्सव के लिए मूर्तियों का मुद्दा

मुंबई, 28 जुलाई: बंबई उच्च न्यायालय ने आगामी गणपति उत्सव के दौरान पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों के उपयोग को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर महाराष्ट्र सरकार से स्पष्ट रुख जानने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों के खिलाफ दायर कई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से सवाल किए और महाधिवक्ता मिलिंद साठे को बुधवार तक सरकार का पक्ष स्पष्ट करने का समय दिया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 2020 में पीओपी की मूर्तियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे।


अदालत ने प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने नागरिकों से पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग करने की अपील की थी। इस पर अदालत ने सरकार की राय मांगी। पिछले वर्ष सीपीसीबी द्वारा यह स्पष्ट किए जाने के बाद कि उनका दिशानिर्देश केवल परामर्शात्मक है, अदालत ने राज्य सरकार की 2025 की नीति के अनुसार प्राकृतिक जल स्रोतों में छह फुट से अधिक ऊंची पीओपी मूर्तियों के विसर्जन की अनुमति दी थी।


जनहित याचिकाओं में सीपीसीबी के दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। हालांकि, पीओपी की मूर्तियां बनाने वाले निर्माताओं ने भी याचिकाएं दायर की हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि इससे उनके व्यापार करने के मौलिक अधिकार पर असर पड़ेगा।