फिनलैंड में दुनिया का पहला स्थायी परमाणु कचरा डस्टबिन तैयार
परमाणु कचरे का सुरक्षित प्रबंधन
नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने एक अनोखे डस्टबिन का निर्माण किया है, जो परमाणु कचरे को एक लाख वर्षों तक सुरक्षित रख सकेगा। इस अवधि के दौरान, रेडियोएक्टिव सामग्री का क्षय होकर वह स्थिति प्राप्त कर लेगा, जो प्राकृतिक यूरेनियम अयस्क में होती है।
डस्टबिन का स्थान और निर्माण
यह विशेष डस्टबिन दक्षिण-पश्चिम फिनलैंड के यूराजोकी में स्थित है, जो जमीन से 433 मीटर की गहराई में बनाया गया है। यहां अरबों वर्ष पुरानी चट्टानों में सुरंगें खोदी गई हैं, ताकि परमाणु बिजली उत्पादन से उत्पन्न रेडियोएक्टिव कचरे को सुरक्षित रूप से दफनाया जा सके।
परमाणु कचरे का स्रोत
हर परमाणु संयंत्र से निकलने वाला कचरा हजारों वर्षों तक रेडियोएक्टिव बना रहता है। पिछले दशक में जब परमाणु संयंत्रों की स्थापना हुई, तब से विभिन्न देशों ने इस कचरे के निपटान की समस्या का सामना किया है।
फिनलैंड का स्थायी समाधान
फिनलैंड का 'ओनकॉलो' डस्टबिन, जो 1.9 अरब वर्ष पुरानी चट्टानों में बनाया गया है, दुनिया का पहला स्थायी डस्टबिन बनने जा रहा है। इसकी अंतिम मंजूरी इस महीने दी जाएगी, जिससे इसके संचालन का लाइसेंस जारी किया जा सकेगा।
सुरक्षित भंडारण की प्रक्रिया
परमाणु कचरे को तांबे के जंगरोधी डिब्बों में बंद किया जाएगा और फिर 433 मीटर गहराई में सुरंग के फर्श में खोदे गए छेदों में रखा जाएगा। इन छेदों को 'बेंटोनाइट' नामक चिकनी मिट्टी से भरा जाएगा, जो एक मजबूत सील का काम करेगा।
कचरे की भंडारण क्षमता
इस डस्टबिन में 6500 टन यूरेनियम कचरा रखने की क्षमता है, जो फिनलैंड के सभी पांच परमाणु रिएक्टरों से निकलने वाले कचरे के लिए पर्याप्त है। यहां 100 वर्षों तक कचरा जमा करने की योजना है, जिसके बाद इसे हमेशा के लिए सील कर दिया जाएगा।
