फकीर मोहन सेनापति की जयंती पर ओडिशा में श्रद्धांजलि

ओडिशा में फकीर मोहन सेनापति की जयंती पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया, जिसमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य प्रमुख नेताओं ने उनके साहित्यिक योगदान की सराहना की। सेनापति, जो उड़िया साहित्य के जनक माने जाते हैं, ने अपनी लेखनी से समाज में महत्वपूर्ण बदलाव लाने का कार्य किया। जानें उनके जीवन और संघर्ष के बारे में।
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फकीर मोहन सेनापति की जयंती पर ओडिशा में श्रद्धांजलि

फकीर मोहन सेनापति को श्रद्धांजलि

ओडिशा में आधुनिक उड़िया साहित्य के संस्थापक माने जाने वाले फकीर मोहन सेनापति को उनकी जयंती के अवसर पर बुधवार को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


इस अवसर पर राज्यपाल हरि बाबू कम्भमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, विपक्ष के नेता नवीन पटनायक, ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने सेनापति को याद किया और उनके उड़िया साहित्य में योगदान की सराहना की।


सेनापति का जन्म 14 जनवरी 1843 को हुआ था। वह एक प्रमुख लेखक, कवि, दार्शनिक और समाज सुधारक थे, जिन्होंने उड़िया भाषा की पहचान को स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन 14 जून 1918 को हुआ।


मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा कि सेनापति का संघर्ष उड़िया भाषा और उसकी पहचान के संरक्षण के लिए आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।