प्रेम के अवैध संबंधों की भयानक सजाएँ: गरुड़ पुराण और मनुस्मृति की शिक्षाएँ
प्रेम का पवित्र स्वरूप और उसके दुरुपयोग की गंभीरता
प्रेम को संसार में ईश्वर का रूप माना जाता है। लेकिन जब यह प्रेम मर्यादा और नैतिकता को दरकिनार कर केवल शारीरिक इच्छाओं में बदल जाता है, तो यह एक गंभीर पाप बन जाता है। इस पाप की सजा इतनी भयानक है कि इसके बारे में जानकर आपका दिल दहल जाएगा।
ऐसी सजा, किसी को आलिंगन करने से पहले लाख बार सोचेंगे
ऐसी सजा, किसी को आलिंगन करने से पहले लाख बार सोचेंगे
गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि जो व्यक्ति मर्यादा की सीमा पार कर परस्त्री या परपुरुष से संबंध बनाता है, उसके लिए यमराज ने कठोर दंड निर्धारित किया है। ऐसे व्यक्ति की आत्मा को दहकते लोहे के खंभे का आलिंगन करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे उसकी आत्मा का शरीर जल जाता है। वह उस क्षण को याद करके रोता है जब उसने अवैध संबंध बनाया था। यमराज के दूतों का दिल भी नहीं पिघलता और वे बार-बार उसे दहकते लौह स्तंभ का आलिंगन करवाते हैं.
मनुस्मृति में परस्त्री संबंध की तीन खौफनाक सजाएँ
मनुस्मृति में परस्त्री संबंध की तीन खौफनाक सजाएँ
मनुस्मृति में यह बताया गया है कि मनुष्य को संयम से काम लेना चाहिए और परस्त्री संबंध से बचना चाहिए। जो व्यक्ति काम भावना के वशीभूत होकर गुरु पत्नी से संबंध जोड़ता है, उसके परलोक में उसके सिर पर योनि का चिन्ह बना दिया जाएगा। यह चिन्ह अगले जन्म में उसके सिर पर दिखाई देगा।
इसके अलावा, उसे आग में लाल हुई स्त्री की मूर्ति का आलिंगन करना होगा जब तक अग्नि उसे शुद्ध नहीं कर देती। तीसरी सजा के तहत, उसे अपने लिंग और अंडकोष को अपने हाथों से काटकर दक्षिण पश्चिम दिशा में चलना होगा जब तक उसकी मृत्यु नहीं हो जाती।
