प्राचीन मिस्र की ममियों का CT स्कैन: स्वास्थ्य समस्याओं का खुलासा

हाल ही में वैज्ञानिकों ने प्राचीन मिस्र की दो ममियों का CT स्कैन किया, जिससे उनकी स्वास्थ्य समस्याओं का पता चला। नेस-मिन और नेस-होर नाम की इन ममियों ने यह दर्शाया कि हजारों साल पहले भी लोग स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे। इस खोज ने विज्ञान और नैतिकता के बीच बहस को जन्म दिया है। जानें इस अद्भुत खोज के बारे में और कैसे वैज्ञानिकों ने बिना ममियों को छुए उनके रहस्यों का पता लगाया।
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प्राचीन मिस्र की ममियों का CT स्कैन: स्वास्थ्य समस्याओं का खुलासा

प्राचीन ममियों की अनकही कहानियाँ

प्राचीन मिस्र की ममियों का CT स्कैन: स्वास्थ्य समस्याओं का खुलासा

क्या आप सोच सकते हैं कि आज के युग में हम 2000 साल पहले के किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य समस्याओं और उम्र का सही अनुमान लगा सकते हैं? यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे संभव कर दिखाया है। हाल ही में, यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने दो प्राचीन मिस्र की ममियों का CT स्कैन किया। जब इन ममियों को स्कैनिंग मशीन में डाला गया, तो जो चित्र सामने आए, उन्होंने विशेषज्ञों को चौंका दिया। इन ममियों ने हजारों साल बाद अपनी खामोशी तोड़ी और यह दर्शाया कि प्राचीन काल में भी लोग स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे। आइए जानते हैं नेस-मिन और नेस-होर नाम की इन ममियों के रहस्यों के बारे में।

पट्टियों के पीछे छिपा दर्द
फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, पहली ममी ‘नेस-मिन’ की थी, जिसकी मृत्यु लगभग 330 ईसा पूर्व में 40 वर्ष की आयु में हुई थी। स्कैन में उसके शरीर में रीढ़ की हड्डी के टूटने और पसलियों में फ्रैक्चर के निशान मिले। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि शोधकर्ताओं को नेस-मिन के शरीर पर कुछ ऐसे निशान मिले जो प्राकृतिक नहीं लग रहे थे। इमेजिंग विभाग की प्रमुख समर डेकर का मानना है कि ये निशान प्राचीन सर्जरी के प्रयास के हो सकते हैं। दूसरी ओर, ‘नेस-होर’ नाम की ममी, जिसकी मृत्यु लगभग 190 ईसा पूर्व में 60 वर्ष की आयु में हुई थी, उसके दांतों में गंभीर समस्याएँ पाई गईं। इसका मतलब है कि हजारों साल पहले भी लोग बुढ़ापे और जोड़ों के दर्द से परेशान थे।

बिना पट्टियाँ खोले कैसे दिखे अंदरूनी राज?
इन ममियों के रहस्यों को जानने के लिए वैज्ञानिकों ने उन्हें छुआ तक नहीं। इसके लिए एक अत्याधुनिक ‘320-स्लाइस CT स्कैनर’ का उपयोग किया गया, जो 0.5 मिलीमीटर की सटीकता से चित्र ले सकता है। मजेदार बात यह है कि इन ममियों को उनके ताबूतों से निकाला भी नहीं गया और मशीन ने उनके शरीर का पूरा 3D डिजिटल मॉडल तैयार कर दिया। यह तकनीक बिल्कुल वैसी ही है जैसे किसी जीवित व्यक्ति का अस्पताल में परीक्षण किया जाता है। इस ‘वर्चुअल ऑटोप्सी’ के माध्यम से वैज्ञानिक अब उन ममियों के कंकाल, अंगों की संरचना और उनके शरीर में मौजूद प्राचीन धातुओं या ताबीजों को बिना किसी नुकसान के देख पा रहे हैं।

आपस में छिड़ी बहस
जहां विज्ञान इस खोज का जश्न मना रहा है, वहीं नैतिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। डरहम यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर क्रिस्टीना रिग्स का कहना है कि प्राचीन मिस्र में शवों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया एक पवित्र और गुप्त प्रक्रिया थी। उनके अनुसार, इन शरीरों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना या स्कैन करना प्राचीन मान्यताओं का अपमान हो सकता है। प्रोफेसर रिग्स का मानना है कि कोई भी तकनीक पूरी तरह से ‘सम्मानजनक’ नहीं हो सकती अगर वह उस व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध उसकी निजता का हनन करती है। यह बहस अब पूरी दुनिया में छिड़ गई है कि विज्ञान की जिज्ञासा बड़ी है या पूर्वजों की आस्था।