प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत: बांकीपुर उपचुनाव में BJP को हराया
प्रशांत किशोर की जीत का महत्व
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज की है। यह सीट भारतीय जनता पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण गढ़ मानी जाती थी। किशोर ने भाजपा के उम्मीदवार नीरज कुमार को 18,000 से अधिक मतों से हराया, जिससे भाजपा को एक बड़ा झटका लगा है। यह सीट पहले भाजपा नेता नितिन नवीन का गढ़ रही है। सोमवार को किशोर ने अपनी पार्टी की पहली चुनावी जीत हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया। उन्होंने बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा को हराकर बिहार में उसके एक प्रमुख गढ़ पर 35 वर्षों से चल रहे कब्जे को समाप्त कर दिया।
मतों का आंकड़ा
किशोर ने भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को 18,953 मतों से पराजित किया। उन्हें कुल 63,203 वोट मिले, जबकि सिन्हा को 44,250 वोट प्राप्त हुए। वहीं, RJD की रेखा गुप्ता 14,085 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। प्रारंभिक रुझानों में बढ़त बनाने के बाद किशोर ने अपनी स्थिति को मजबूत किया, और 36 राउंड की गिनती में से 15वें राउंड तक उनकी जीत लगभग सुनिश्चित हो गई थी। यह उपचुनाव तब हुआ जब भाजपा नेता नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई, जिन्हें बाद में राज्यसभा के लिए चुना गया।
किशोर का चुनावी अभियान
यह जीत प्रशांत किशोर की महीनों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने भाजपा और RJD के चुनाव प्रचार शुरू करने से लगभग दो महीने पहले ही अपने अभियान की शुरुआत की थी। इस दौरान, किशोर ने जनसभाएं आयोजित कीं, घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया और पूरे चुनाव क्षेत्र में बूथ-स्तर का संगठन तैयार किया। उन्होंने उपचुनाव को "सम्राट चौधरी सरकार पर जनमत संग्रह" के रूप में प्रस्तुत किया। उनका अभियान मुख्य रूप से रोजगार, शिक्षा और गवर्नेंस पर केंद्रित था, जिसमें पहली बार वोट देने वालों और Gen Z वोटर्स पर विशेष ध्यान दिया गया।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा ने इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई माना और सीट को बचाने के लिए लगभग 40 स्टार प्रचारकों और हजारों कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा। चुनाव के अंतिम चरण में कई वरिष्ठ नेताओं ने बांकीपुर में जोरदार प्रचार किया। अपनी जीत के बाद, किशोर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी प्राथमिकता बांकीपुर के लोगों के विश्वास का सम्मान करना है।
भविष्य की योजनाएं
किशोर ने कहा कि इस जीत के बाद उनकी पहली प्राथमिकता बांकीपुर के लोगों के आशीर्वाद और विश्वास का सम्मान करना है। वे बांकीपुर को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। अगले दो-तीन महीनों में बदलाव दिखने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने निवासियों को आश्वस्त किया कि उनके विधायक बनने से बांकीपुर रातों-रात बेंगलुरु नहीं बन जाएगा, लेकिन अगले कुछ महीनों में सुधार स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगेगा।
