प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर पश्चिम एशिया के मुद्दे पर बेतुकी टिप्पणियों का आरोप लगाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वह पश्चिम एशिया के संदर्भ में बेतुकी टिप्पणियां कर रही है, जिससे भारतीय प्रवासियों को खतरा हो सकता है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की तीन-भाषा नीति पर की गई टिप्पणियों की आलोचना की है। प्रधान ने इसे भाषाई थोपने का प्रयास बताया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह नीति सभी भाषाओं को समान रूप से बढ़ावा देती है और छात्रों के बहुभाषी बनने के अवसरों को सुदृढ़ करती है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर पश्चिम एशिया के मुद्दे पर बेतुकी टिप्पणियों का आरोप लगाया

प्रधानमंत्री मोदी की कांग्रेस पर टिप्पणी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वह पश्चिम एशिया के संदर्भ में "बेतुकी" टिप्पणियां कर रही है, जिसका उद्देश्य अविश्वास पैदा करना और भारतीय प्रवासियों को खतरे में डालना है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की तीन-भाषा फॉर्मूले पर की गई टिप्पणियों की आलोचना करते हुए इसे "थोपने" का प्रयास बताया, जो राजनीतिक खामियों को छिपाने का एक बेकार तरीका है।


धर्मेंद्र प्रधान की प्रतिक्रिया

प्रधान ने कहा कि नीति को भाषाई थोपना बताना एक प्रगतिशील और समावेशी सुधार को गलत तरीके से पेश करना है, जिससे अनावश्यक भय और भ्रम उत्पन्न होता है। स्टालिन ने पहले यह तर्क किया था कि तीन-भाषा फॉर्मूला गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी को बढ़ावा देने का एक गुप्त तरीका है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप सीबीएसई के पाठ्यक्रम ढांचे को भाषाई थोपने की दिशा में एक चिंताजनक कदम बताया।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति का महत्व

प्रधान ने आगे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 "भाषाई मुक्ति" की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो मातृभाषा में शिक्षा पर जोर देती है, ताकि तमिल भाषी छात्रों सहित हर बच्चा अपनी मातृभाषा में उत्कृष्टता प्राप्त कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस नीति को अनिवार्य हिंदी के रूप में प्रस्तुत करना छात्रों के बहुभाषी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के अवसरों को कमजोर करता है। उनके अनुसार, बहुभाषावाद तमिल भाषा को कमजोर करने के बजाय उसे और मजबूत करेगा।


नई नीति का उद्देश्य

प्रधान ने यह भी स्पष्ट किया कि नई नीति सभी भाषाओं को समान रूप से बढ़ावा देती है, संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है और मौजूदा दो-भाषा प्रणाली में सुधार लाने का प्रयास करती है। उन्होंने समग्र शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और संस्थागत सुदृढ़ीकरण जैसी पहलों के माध्यम से किए जा रहे कार्यान्वयन प्रयासों पर प्रकाश डाला। स्टालिन की आलोचना करते हुए प्रधान ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु सरकार ने पहले किए गए वादों के बावजूद आवश्यक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर न करके पीएम-श्री स्कूलों की स्थापना में देरी की है, जिससे कई वंचित छात्रों को बेहतर बुनियादी ढांचे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित होना पड़ा है।