प्रधानमंत्री मोदी ने असम में बोडो संस्कृति के कार्यक्रम में भाग लिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के गुवाहाटी में बोडो समुदाय के सांस्कृतिक उत्सव 'बागुरुम्बा द्वौ 2026' में भाग लिया। इस कार्यक्रम में उन्होंने पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाने का प्रयास किया और बोडो संस्कृति की सराहना की। मोदी ने असम की प्रगति और शांति के लिए बोडो शांति समझौते के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने असम की कला और संस्कृति को बढ़ावा देने की अपनी इच्छा व्यक्त की और राजनीतिक संदर्भ में कुछ दलों की आलोचना की।
| Jan 17, 2026, 20:02 IST
बोडो समुदाय के सांस्कृतिक उत्सव में प्रधानमंत्री का योगदान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुवाहाटी, असम में बोडो समुदाय के पारंपरिक सांस्कृतिक उत्सव 'बागुरुम्बा द्वौ 2026' में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक वाद्य यंत्र 'सेर्जा' बजाने का प्रयास किया और उन्हें इस कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर 10,000 से अधिक बोडो कलाकारों ने सामूहिक रूप से बागुरुम्बा नृत्य प्रस्तुत किया। मोदी ने कहा कि उन्हें असम की संस्कृति और बोडो परंपराओं को करीब से देखने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद, उन्होंने असम की यात्रा कई बार की है, जो कि किसी अन्य प्रधानमंत्री द्वारा नहीं की गई।
असम की कला और संस्कृति को बढ़ावा देने की इच्छा
मोदी ने कहा कि उनकी हमेशा से यह इच्छा रही है कि असम की कला और संस्कृति को एक बड़ा मंच मिले, ताकि इसकी पहचान देश और विदेश में बने। उन्होंने उल्लेख किया कि बड़े आयोजनों के माध्यम से, जैसे बिहू और बोडोलैंड महोत्सव, असम की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि असम की कला और संस्कृति में अद्भुत आनंद है, और वह इसे अनुभव करने का कोई मौका नहीं छोड़ते।
बागुरुम्बा का महत्व और असम की प्रगति
मोदी ने कहा कि बागुरुम्बा दहोउ केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह बोडो परंपरा का सम्मान करने का एक माध्यम है। उन्होंने भाजपा सरकार की ओर से असम की हर विरासत का सम्मान करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने ज्योति प्रसाद अग्रवाला की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने कहा कि असम का आत्मविश्वास और प्रगति भारत की विकास कहानी को नई ऊर्जा दे रही है। असम तेजी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है।
असम में शांति और विकास की नई कहानी
प्रधानमंत्री ने भावुक होकर कहा कि असम कितना आगे बढ़ रहा है। जहां पहले रक्तपात होता था, आज वहां संस्कृति के रंग बिखरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि 2020 का बोडो शांति समझौता वर्षों से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने में सफल रहा है। इस समझौते के बाद, हजारों युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। बोडो युवा अब असम के सांस्कृतिक दूत बन रहे हैं।
राजनीतिक संदर्भ में असम का सम्मान
मोदी ने कहा कि जब हम असम की कला और संस्कृति का सम्मान करते हैं, तो कुछ राजनीतिक दलों को इससे परेशानी होती है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि उसने भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने का विरोध किया और असम में सेमीकंडक्टर यूनिट का भी विरोध किया।
