प्रधानमंत्री मोदी ने अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं

प्रधानमंत्री मोदी ने अमरनाथ यात्रा की शुरुआत पर श्रद्धालुओं के लिए शुभकामनाएं दीं। यात्रा 28 अगस्त को समाप्त होगी, जिसमें सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। तीर्थयात्रियों का पहला जत्था बालटाल और नुनवान से रवाना हुआ, जहां बर्फ का प्राकृतिक शिवलिंग है। जानें यात्रा के बारे में और क्या कहा मोदी ने।
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अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ

प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को अमरनाथ यात्रा की शुरुआत पर श्रद्धालुओं के लिए एक पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने उनकी यात्रा को सुरक्षित और सफल बनाने की कामना की। वार्षिक अमरनाथ यात्रा का आगाज़ शुक्रवार को हुआ, जब तीर्थयात्रियों का पहला समूह बालटाल और नुनवान के दो बेस कैंपों से 3,880 मीटर ऊंचे गुफा मंदिर की ओर प्रस्थान किया। इस गुफा में प्राकृतिक रूप से निर्मित बर्फ का शिवलिंग स्थित है।


मोदी का संदेश

मोदी ने क्या लिखा

मोदी ने अपने पत्र में कहा कि बाबा बर्फानी के दर्शन से जुड़ी यह यात्रा हमारी आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि शिव भक्तों की यह यात्रा हर दृष्टि से सुरक्षित और मंगलमय हो! इस पावन अवसर पर, उन्होंने तीर्थयात्रियों के लिए पांच संकल्पों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अनंतनाग के पहलगाम के नुनवान बेस कैंप और गांदरबल के सोनमर्ग क्षेत्र के बालटाल बेस कैंप से पुरुषों, महिलाओं और साधुओं का जत्था सुबह-सुबह रवाना हुआ।


जत्थे का स्वागत

जब संबंधित डिप्टी कमिश्नरों और SSP ने बेस कैंपों से जत्थों को हरी झंडी दिखाई, तो 'बम बम भोले' के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। जम्मू के भगवती नगर में यात्रा बेस कैंप से 4,809 से अधिक तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।


यात्रा की अवधि

28 अगस्त को संपन्न होगी तीर्थयात्रा

तीर्थयात्री दोपहर में कश्मीर घाटी पहुंचे, जहां प्रशासन और स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। वे गुफा मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे, जहां बर्फ का प्राकृतिक शिवलिंग है। यात्रा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और अन्य अर्धसैनिक बलों के हजारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा, हवाई निगरानी भी की जाएगी। यह तीर्थयात्रा 57 दिनों तक चलेगी और 28 अगस्त को समाप्त होगी।