प्रधानमंत्री मोदी के सुरक्षा काफिले में कटौती पर विशेषज्ञों की चिंताएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षा काफिले के आकार में कमी के निर्णय ने सुरक्षा विशेषज्ञों और पूर्व पुलिस अधिकारियों के बीच चिंता का विषय बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में प्रधानमंत्री की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। रॉ के पूर्व सचिव सामंत गोयल ने सुरक्षा खतरों के बदलते स्वरूप पर चिंता जताई है, जबकि जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा में ढिलाई न बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
| May 16, 2026, 12:16 IST
प्रधानमंत्री की सुरक्षा पर उठे सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने सुरक्षा काफिले के आकार को कम करने के निर्णय ने देश में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। इस कदम को एक ओर ईंधन की बचत और सादगी का प्रतीक माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कई पूर्व पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है। उनका मानना है कि वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्यों में प्रधानमंत्री की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंताएं
रॉ के पूर्व सचिव सामंत गोयल ने इस निर्णय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा माहौल अत्यंत अस्थिर है। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई सुरक्षित देशों में भी शीर्ष नेताओं पर हमले हो चुके हैं। भारत के खिलाफ सक्रिय आतंकी और शत्रुतापूर्ण तत्व लगातार साजिशें रच रहे हैं, विशेषकर पड़ोसी देशों से प्रायोजित आतंकी गतिविधियां अब भी एक गंभीर खतरा बनी हुई हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की सुरक्षा को कम करने के बजाय इसे और मजबूत करने की आवश्यकता है।
सुरक्षा के नए खतरे
सामंत गोयल ने कहा कि आज सुरक्षा खतरों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, जिसमें ड्रोन और दूर से निशाना साधने वाली अत्याधुनिक बंदूकें शामिल हैं। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा का निरंतर पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए और सुरक्षा घेरे को और सुदृढ़ बनाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में कमी देशहित में नहीं हो सकती।
सुरक्षा का महत्व
उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा किसी प्रतिष्ठा का प्रतीक नहीं होती, बल्कि यह खतरे के आकलन पर निर्भर करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए लगातार खतरे मिलते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय गिरोहों और कट्टरपंथी आतंकी संगठनों की नजर लंबे समय से उन पर है। ऐसे में यदि प्रधानमंत्री के काफिले में बहुत कम वाहन होंगे, तो विरोधी ताकतों के लिए उन्हें निशाना बनाना आसान हो सकता है।
पूर्व पुलिस महानिदेशक की राय
जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने कहा कि प्रधानमंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि जब देश का प्रधानमंत्री ईंधन बचाने के लिए कदम उठा सकता है, तो आम नागरिकों को भी ऐसा करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री दुनिया के सबसे अधिक खतरे वाले नेताओं में से एक हैं और उनकी सुरक्षा में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।
विशेष सुरक्षा समूह की भूमिका
प्रधानमंत्री की सुरक्षा का दायित्व विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के पास है, जो देश की सबसे प्रशिक्षित सुरक्षा इकाइयों में से एक है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि काफिले का आकार घटाने का निर्णय सुरक्षा से समझौता किए बिना लिया गया है। जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने एसपीजी को काफिले का आकार लगभग पचास प्रतिशत तक कम करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री कार्यालय को उनके वाहन बेड़े में विद्युत चालित वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने का भी निर्देश दिया गया है।
ऊर्जा संकट और ईंधन बचत
बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती ऊर्जा कीमतों और ईंधन बचत की आवश्यकता को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। हाल ही में, प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से भी ईंधन बचत और सादगी अपनाने की अपील की थी। उन्होंने साझा यात्रा, सार्वजनिक परिवहन, घर से काम करने और अनावश्यक विदेशी यात्राओं में कमी जैसे उपायों को अपनाने का आग्रह किया था।
