प्रधानमंत्री मोदी के निकट जिमखाना क्लब पर कार्रवाई: एक रिटायर्ड बस कंडक्टर की प्रेरणादायक कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिमखाना क्लब को खाली करने का आदेश दिया है, जो उनके निवास के निकट स्थित है। इस क्लब का इतिहास और इसके सदस्यों की सोच पर चर्चा के साथ, हम एक रिटायर्ड बस कंडक्टर अंके गड़ा की प्रेरणादायक कहानी भी साझा कर रहे हैं, जिन्होंने भारत के सबसे बड़े मुफ्त पुस्तकालय की स्थापना की है। जानें कैसे उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई को पुस्तकों के संग्रह में लगाया और समाज के लिए एक मिसाल कायम की।
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प्रधानमंत्री मोदी के निकट जिमखाना क्लब पर कार्रवाई: एक रिटायर्ड बस कंडक्टर की प्रेरणादायक कहानी gyanhigyan

प्रधानमंत्री मोदी की कार्रवाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष खड़ा व्यक्ति उनकी सबसे बड़ी ताकत है। यदि पीएम मोदी उन्हें आमंत्रित नहीं करते, तो देश को उनके बारे में जानकारी नहीं मिलती। आपने अक्सर सुना होगा कि कुछ प्रभावशाली लोग कहते हैं कि सरकार उनकी है, लेकिन सिस्टम उनका है। अब पीएम मोदी ने उसी सिस्टम पर एक बड़ा कदम उठाया है। पीएम मोदी के निवास के निकट एक क्लब है, जिसे जिमखाना क्लब कहा जाता है। हाल के दिनों में इस क्लब के बारे में चर्चा बढ़ी है। पीएम आवास के पास स्थित इस क्लब को अब जमीन खाली करने का आदेश दिया गया है, क्योंकि यह सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। प्रधानमंत्री का निवास 11 एकड़ में फैला है, जबकि जिमखाना क्लब 27 एकड़ में स्थित है।


जिमखाना क्लब का इतिहास

जब अंग्रेजों ने इस क्लब की स्थापना की थी, तब केवल अंग्रेजों को ही यहाँ प्रवेश मिलता था। भारतीयों का आना प्रतिबंधित था। लेकिन जब अंग्रेज चले गए, तो इस क्लब पर भारत के धनवान लोगों ने कब्जा कर लिया और यहाँ केवल अमीरों के लिए प्रवेश सुनिश्चित किया गया। सोशल मीडिया पर कई लोग यह कह रहे हैं कि गोरे अंग्रेजों के बाद अब इस क्लब पर भारत के तथाकथित अमीर भूरे अंग्रेजों का राज है। क्लब के सदस्य खुद को दिल्ली के पावर सर्किट का हिस्सा मानते हैं। ये लोग दिखाते हैं कि सरकार मोदी चला रहे हैं, लेकिन सिस्टम उनके हाथ में है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस क्लब का सालाना किराया मात्र ₹1000 है, जबकि यह हजारों करोड़ों की जमीन पर बना है।


एक रिटायर्ड बस कंडक्टर की प्रेरणा

कर्नाटक के 75 वर्षीय पूर्व बस कंडक्टर अंके गड़ा ने भारत के सबसे बड़े मुफ्त पुस्तकालयों में से एक की स्थापना की है, जिसके लिए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 20 साल की उम्र में बस कंडक्टर के रूप में काम करते हुए, अंके गड़ा ने अपनी कमाई से किताबें खरीदना शुरू किया, जिससे एक विशाल पुस्तकालय की नींव रखी गई। उन्होंने अपनी आय का लगभग 80% हिस्सा पुस्तकों के संग्रह में लगाया और 20 लाख से अधिक पुस्तकों वाला एक विशाल निशुल्क सार्वजनिक पुस्तकालय स्थापित किया। अंके गड़ा का समर्पण इतना गहरा था कि उन्होंने अपने घर को भी बेचकर किताबों का संग्रह बढ़ाया।