प्रधानमंत्री मोदी की सचिवों के साथ महत्वपूर्ण बैठक: आत्मनिर्भरता और समन्वय पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सचिवों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में आत्मनिर्भरता, समन्वय और प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा की। इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने विचार साझा किए और सरकार की कार्यशैली को तेज करने के लिए सुझाव दिए। प्रधानमंत्री ने सभी विभागों को समन्वित तरीके से काम करने का निर्देश दिया और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही। बैठक में सस्ते चीनी आयात, नवीकरणीय ऊर्जा, और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जानें इस बैठक के प्रमुख बिंदु और सरकार की आगामी नीतियों के बारे में।
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प्रधानमंत्री की सचिवों के साथ बैठक

सेशेल्स यात्रा से लौटने के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को केंद्र सरकार के सभी प्रमुख विभागों के सचिवों के साथ लगभग चार घंटे तक गहन चर्चा की। इससे पहले, मई में पांच देशों की यात्रा से लौटने के बाद भी उन्होंने अपनी मंत्रिपरिषद के साथ लंबी बैठक की थी, जिसमें मंत्रालयों के कार्यों की समीक्षा की गई थी। इस बैठक से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री अपनी सरकार की कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया को और अधिक तेज करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।




नई दिल्ली में सेवा तीर्थ में आयोजित इस बैठक में आत्मनिर्भरता, व्यापार में सुगमता, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और विभागों के बीच बेहतर समन्वय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों को समन्वित तरीके से काम करने का निर्देश दिया और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समयबद्ध और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने पर जोर दिया।




बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी विभागों को अलग-अलग कार्य करने के बजाय "समूची सरकार" के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विभागीय सीमाओं को तोड़कर समन्वित योजना और पारदर्शी कार्यप्रणाली को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। पीएम गतिशक्ति मंच के व्यापक उपयोग की वकालत करते हुए, उन्होंने कहा कि यह विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय और सूचनाओं के आधार पर निर्णय लेने का एक प्रभावी साधन हो सकता है।




बैठक की शुरुआत अपेक्षाकृत हल्के अंदाज में हुई, जहां प्रधानमंत्री ने सचिवों से कहा कि वह इस बार केवल सुनने की भूमिका में रहेंगे। इसके बाद, तीन दर्जन से अधिक सचिवों ने लगभग तीन-तीन मिनट में अपनी बात रखी। बैठक का संचालन कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने किया, जिन्होंने सरकारी वेबसाइटों और पोर्टलों को आम नागरिकों के लिए अधिक उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।




बैठक में दो प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई: पहला, कारोबार करने और जीवन को आसान बनाने के लिए विनियमन में कमी और सुधार, और दूसरा आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना। कई मंत्रालयों ने विदेशी निर्भरता कम करने और घरेलू उद्योगों को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर चिंता व्यक्त की।




सस्ते चीनी आयात और विदेशी उत्पादों की डंपिंग पर भी चर्चा हुई। इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने बताया कि भारत में इस्पात की मांग बढ़ रही है, जबकि चीन सहित कई देशों में मांग में गिरावट आ रही है। ऐसे में विदेशी कंपनियां कम कीमत पर इस्पात भारत भेज रही हैं, जिससे घरेलू उद्योग प्रभावित हो सकता है। उन्होंने सरकार से भारतीय उत्पादकों को संरक्षण देने और सस्ते विदेशी माल की डंपिंग रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता बताई।




प्रधानमंत्री ने इस विषय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग क्षेत्र देश के कुल कच्चे इस्पात उत्पादन में लगभग पैंतालीस प्रतिशत योगदान देता है। इसलिए इस क्षेत्र की सुरक्षा और मजबूती के लिए विशेष कदम उठाना आवश्यक है। सरकार घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने और विदेशी दबाव से बचाने के लिए नीतिगत उपायों पर विचार कर रही है।




नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता का मुद्दा उठाया गया। नवीकरणीय ऊर्जा सचिव संतोष कुमार सारंगी ने बताया कि भारत सौर पैनलों के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर हो चुका है, लेकिन सौर सेल के लिए अब भी विदेशों, विशेषकर चीन, पर भारी निर्भरता बनी हुई है। उन्होंने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता बताई।




बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रौद्योगिकी से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई। गृह सचिव गोविंद मोहन ने कहा कि साइबर सुरक्षा व्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी तकनीकों का स्वदेशीकरण बेहद जरूरी है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि इन क्षेत्रों में विदेशी तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता बनी रही तो भविष्य में बाहरी ताकतें इनका दुरुपयोग कर सकती हैं। रक्षा सचिव आरके सिंह ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन के हालिया युद्धों का उल्लेख करते हुए हथियारों और गोला बारूद के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर दिया।




बैठक के दौरान पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक सुधारों पर भी विचार हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले स्थलों और आरक्षित वनों की संख्या बढ़ना संतोषजनक है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के लिए भी समूची सरकार के दृष्टिकोण से काम करना होगा। उन्होंने योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए नियमित समीक्षा और स्पष्ट परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने पर बल दिया।




प्रधानमंत्री मोदी ने सचिवों से कहा कि किसी भी योजना की सफलता का वास्तविक मापदंड लोगों के जीवन पर उसका प्रत्यक्ष प्रभाव होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुधार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका लाभ आम नागरिकों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचना चाहिए। बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रौद्योगिकी आधारित शासन व्यवस्था के उपयोग पर भी चर्चा हुई।




कुल मिलाकर, यह बैठक सरकार की भावी नीतियों, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य, प्रशासनिक समन्वय और आर्थिक सुरक्षा को लेकर गंभीर मंथन का महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। इसमें स्पष्ट संकेत मिला कि केंद्र सरकार आने वाले समय में घरेलू उद्योगों की सुरक्षा, तकनीकी स्वदेशीकरण और बेहतर प्रशासनिक तालमेल को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करने जा रही है।