प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे यात्रा: द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी छह दिवसीय यात्रा के तहत संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। नॉर्वे में होने वाले तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में मोदी नॉर्वे के शीर्ष नेतृत्व के साथ वार्ता करेंगे। जानें नॉर्वे की अद्वितीय जलवायु और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के बारे में।
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प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे यात्रा: द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम gyanhigyan

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का उद्देश्य

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी छह दिवसीय यात्रा के दौरान संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य वैश्विक भूराजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है। यह यात्रा भारत और नॉर्वे के बीच हुई प्रगति की समीक्षा करने और व्यापार एवं निवेश पर ध्यान केंद्रित करने का एक अवसर भी है।


भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 19 मई को ओस्लो में आयोजित होगा, जिसमें मोदी के साथ नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के नेता भी शामिल होंगे। यह सम्मेलन पिछले दो शिखर सम्मेलनों पर आधारित होगा, जो अप्रैल 2018 में स्टॉकहोम और मई 2022 में कोपेनहेगन में हुए थे। इससे नॉर्डिक देशों के साथ भारत के संबंधों को एक नई रणनीतिक दिशा मिलने की उम्मीद है।


नॉर्वे में द्विपक्षीय वार्ता

मोदी 18 से 19 मई तक नॉर्वे में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और नॉर्वे के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह यात्रा 1983 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी। नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और जलवायु, प्रौद्योगिकी, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।


नॉर्वे की अद्वितीय जलवायु

प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे यात्रा: द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम


नॉर्वे को 'मिडनाइट सन' यानी आधी रात के सूरज का देश कहा जाता है। यह आर्कटिक सर्किल के निकट स्थित है, जिससे यहां दिन और रात का चक्र अन्य देशों से भिन्न है। स्वालबार्ड जैसे उत्तरी क्षेत्रों में 6 महीने तक लगातार रात रहती है।


पोलर नाइट का रहस्य

पोलर नाइट का यह अद्भुत अनुभव पृथ्वी के अपनी धुरी पर झुकाव के कारण होता है। जब पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है, तो इसके विभिन्न हिस्सों में सूरज की रोशनी की मात्रा बदलती रहती है। इस कारण सर्दियों में लंबे समय तक अंधेरा और गर्मियों में लगातार दिन का उजाला रहता है। यह प्राकृतिक घटना नॉर्वे के अलावा अलास्का, कनाडा और रूस के कुछ उत्तरी क्षेत्रों में भी देखी जाती है।


भारतीय समुदाय

नॉर्वे, जो यूरोप महाद्वीप में स्थित है, की राजधानी ओस्लो है। यहां लगभग 25 हजार भारतीय निवास करते हैं। यह देश यूरोप में न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाले देशों में दूसरे स्थान पर है।