प्रधानमंत्री मोदी की UAE यात्रा और नेतन्याहू की गुप्त यात्रा का विवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी UAE यात्रा के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गुप्त यात्रा का दावा सामने आया है, जिसे यूएई ने खारिज कर दिया है। यह विवाद क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच उभरा है, जिसमें इजरायल और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों का भी जिक्र है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की सच्चाई।
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प्रधानमंत्री मोदी की UAE यात्रा और नेतन्याहू की गुप्त यात्रा का विवाद gyanhigyan

भारत और UAE के बीच सहयोग बढ़ाने की योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई को खाड़ी देशों की यात्रा पर जा रहे हैं, जहां भारत और संयुक्त अरब अमीरात तरलीकृत पेट्रोलियम गैस और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।


नेतन्याहू की गुप्त यात्रा का विवाद

इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की संयुक्त अरब अमीरात की गुप्त यात्रा के बारे में एक बड़ा दावा सामने आया है। इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि नेतन्याहू ने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। हालांकि, अबू धाबी ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। नेतन्याहू के कार्यालय ने बताया कि यह यात्रा 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' के दौरान हुई थी, जिसमें इजरायल और यूएई के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई।


क्षेत्रीय तनाव और इजरायल-यूएई संबंध

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब ईरान में इजरायल की सैन्य गतिविधियों के कारण क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने ईरान के साथ संघर्ष के दौरान यूएई में आयरन डोम वायु रक्षा प्रणाली और सैन्य कर्मियों को भेजा था। इसके अलावा, मोसाद प्रमुख ने भी इस दौरान यूएई की यात्रा की थी।


यूएई का स्पष्टीकरण

इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के तुरंत बाद, यूएई ने नेतन्याहू की यात्रा के दावे को खारिज कर दिया। यूएई के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उनके इजरायल के साथ संबंध सार्वजनिक हैं और अब्राहम समझौते के तहत संचालित होते हैं। मंत्रालय ने कहा कि बिना सूचना के दौरे या गुप्त समझौतों का कोई दावा पूरी तरह से निराधार है।