प्रधानमंत्री मोदी का हथकरघा क्षेत्र के प्रति समर्थन: ग्रामीण सशक्तीकरण का आधार
हथकरघा क्षेत्र का महत्व
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को यह स्पष्ट किया कि उनकी सरकार हथकरघा उद्योग को निरंतर समर्थन प्रदान करती रहेगी। उन्होंने इसे ग्रामीण सशक्तीकरण, महिला-नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए, उन्होंने भारत की समृद्ध और जीवंत हथकरघा विरासत का जश्न मनाने की बात की और बुनकरों तथा कारीगरों की कौशल, रचनात्मकता और समर्पण को सराहा। मोदी ने कहा कि ये कारीगर पीढ़ियों से भारत की परंपराओं को संरक्षित और समृद्ध कर रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में, प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार हथकरघा क्षेत्र को निरंतर समर्थन देती रहेगी, जो ग्रामीण सशक्तीकरण, महिला-नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण आधार है।" उन्होंने लोगों से अपील की कि वे 'नेशनल हैंडलूम डे' हैशटैग का उपयोग करते हुए अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों और 'जीआरडब्ल्यूएम' (ग्रेट रेडी विद मी) वीडियो साझा करें।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का इतिहास
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि इस पहल से हथकरघा क्षेत्र से जुड़े लोगों का उत्साह बढ़ेगा। हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है, जो 1905 में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की याद में मनाया जाता है। इस आंदोलन ने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा दिया और आत्मनिर्भरता की भावना को प्रोत्साहित किया।
बृहस्पतिवार रात, प्रधानमंत्री ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने लोगों से हथकरघा उत्पाद खरीदने और उनसे जुड़े वीडियो बनाने की अपील की। उनका उद्देश्य था कि इससे दुनिया भर के लोगों का ध्यान भारतीय हथकरघा उत्पादों की ओर आकर्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि हथकरघा दिवस मनाने का मतलब बुनकरों और छोटे व्यापारियों की सहायता करना भी है।
