प्रधानमंत्री मोदी का इज़राइल दौरा: राजनीतिक विवादों के बीच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इज़राइल दौरा 25-26 फरवरी 2026 को प्रस्तावित है, लेकिन इससे पहले ही वहाँ की संसद में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। विपक्षी दलों ने मोदी जी के संबोधन का बहिष्कार करने की धमकी दी है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष को आमंत्रित नहीं किया गया। इस विवाद के चलते इज़राइल की आंतरिक राजनीति में तनाव बढ़ गया है। जानें इस मुद्दे पर क्या कहा गया है और मोदी के दौरे का क्या महत्व है।
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प्रधानमंत्री मोदी का इज़राइल दौरा: राजनीतिक विवादों के बीच

इज़राइल में राजनीतिक विवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज़राइल दौरे से पहले, वहाँ की संसद केनेसेट में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। विपक्षी दलों ने मोदी जी के संसद में संबोधन का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है, क्योंकि केनेसेट के स्पीकर अमीर ओहाना ने सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष यित्ज़ाक अमीत को विशेष सत्र में आमंत्रित नहीं किया।


विपक्ष की प्रतिक्रिया

यह विवाद इज़राइल में न्यायिक सुधारों और सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को लेकर चल रहे टकराव का हिस्सा है। विपक्ष के नेता याइर लैपिड ने कहा है कि यदि अमीत को नहीं बुलाया गया, तो वे और उनके सहयोगी सांसद सत्र में शामिल नहीं होंगे। उनका कहना है कि इससे संसद की गरिमा को नुकसान होगा और विदेशी मेहमान के सामने आधी खाली सदन की छवि बनेगी। लैपिड ने चेतावनी दी कि इससे भारत जैसे बड़े देश के प्रधानमंत्री के सामने इज़राइल को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा।


स्पीकर का बयान

वहीं, केनेसेट के स्पीकर अमीर ओहाना ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री मोदी आधी खाली संसद को संबोधित नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष बहिष्कार करता है, तो पूर्व सांसदों को आमंत्रित किया जाएगा ताकि उनकी सीटें भरी जा सकें। इज़राइली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ओहाना ने कहा, "चिंता मत कीजिए, मैं वादा करता हूँ कि पीएम मोदी आधी खाली प्लेनम को संबोधित नहीं करेंगे।"


मोदी का प्रस्तावित दौरा

यह मामला इज़राइल की आंतरिक राजनीति से जुड़ा हुआ है, जहाँ नेतन्याहू सरकार सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता को सीमित करने का प्रयास कर रही है, जबकि विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। मोदी जी का दौरा 25-26 फरवरी 2026 को प्रस्तावित है, जिसमें वे इज़राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे और केनेसेट को संबोधित करेंगे। यह दौरा भारत-इज़राइल संबंधों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है, लेकिन घरेलू विवाद ने इसे राजनीतिक विवादों में घेर लिया है।