प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत का छात्रों और न्यायपालिका पर महत्वपूर्ण संदेश
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में भिवानी और जयपुर में दो कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण संदेश दिए। उन्होंने छात्रों को सफलता के लिए प्रेरित किया और न्यायपालिका पर जनता के विश्वास की महत्ता पर जोर दिया। उनके विचारों ने शिक्षा के व्यापक उद्देश्य और पूर्व न्यायाधीशों के अनुभव के महत्व को उजागर किया। जानें उनके विचारों के पीछे की गहराई और समाज के लिए उनके संदेश का क्या अर्थ है।
| Apr 26, 2026, 15:05 IST
प्रधान न्यायाधीश का प्रेरणादायक संदेश
हाल ही में, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने दो अलग-अलग अवसरों पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। भिवानी के चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में, उन्होंने छात्रों को देश का भविष्य बताते हुए उन्हें मजबूत नैतिकता और जिम्मेदारी सिखाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा, जयपुर में 'सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की संघ' के कार्यक्रम में, उन्होंने न्यायपालिका पर जनता के विश्वास और पूर्व न्यायाधीशों के अनुभव की अहमियत पर चर्चा की।
छात्रों के लिए प्रेरणा
भिवानी में छात्रों को संबोधित करते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि केवल शैक्षणिक डिग्रियां ही सफलता की कुंजी नहीं होतीं। उन्होंने कहा, "सफलता अनुशासन, मेहनत, समय का सही उपयोग और निरंतर सीखने की इच्छा से प्राप्त होती है।" उन्होंने शिक्षा के व्यापक उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका मतलब केवल रोजगार पाना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और अच्छे नैतिक मूल्यों का विकास होना चाहिए। छात्रों को स्वामी विवेकानंद और नेल्सन मंडेला जैसे महान व्यक्तियों से प्रेरणा लेकर देश और समाज के विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
न्यायपालिका पर विश्वास
जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और उससे संबंधित संस्थाओं में जनता का गहरा विश्वास है। इस विश्वास को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की तुलना राजस्थान की 'बावड़ियों' से की, यह बताते हुए कि जैसे बावड़ियां सूखे में पानी का स्रोत होती हैं, वैसे ही पूर्व न्यायाधीशों का अनुभव आज भी अत्यंत मूल्यवान है। उनका ज्ञान लोक अदालतों और मध्यस्थता जैसे कार्यों में समाज के लिए एक अमूल्य संसाधन है।
