प्रतीक यादव का निधन: राजनीति से दूरी और जानवरों के प्रति लगाव

प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे, का आज सुबह निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार थे और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। जानवरों के प्रति उनकी गहरी रुचि और फिटनेस के प्रति लगाव के लिए जाने जाने वाले प्रतीक ने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। उनकी पत्नी अपर्णा यादव पहले समाजवादी पार्टी से जुड़ी थीं, लेकिन अब भाजपा में हैं। जानें उनके जीवन के बारे में और कैसे उन्होंने समाज सेवा में योगदान दिया।
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प्रतीक यादव का निधन

मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का आज सुबह निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वह कुछ समय से बीमार थे और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से संबंध रखने के बावजूद, वह सक्रिय राजनीति से दूर रहे। फिटनेस के प्रति उनकी गहरी रुचि थी और जानवरों के प्रति उनका विशेष लगाव था, जिसके चलते उन्होंने एक एनजीओ भी स्थापित किया।


बीमारी और अस्पताल में भर्ती

प्रतीक यादव को पिछले महीने 30 अप्रैल को गंभीर बीमारी के कारण लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी स्थिति में सुधार होने के बाद उन्हें घर लाया गया, लेकिन रात में उनकी तबीयत फिर से बिगड़ गई। सुबह 5:55 बजे उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही उनका निधन हो गया।


मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी का बेटा

38 वर्षीय प्रतीक यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे थे। वह मुलायम की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पहले पति से हुए बेटे थे। सक्रिय राजनीति में आने के बजाय, उन्होंने रियल एस्टेट, फिटनेस सेंटर और पशु कल्याण के कार्यों में रुचि दिखाई।


जानवरों के प्रति प्रतिबद्धता

प्रतीक ने 'जीव आश्रय' नामक संस्था की स्थापना की, जो स्ट्रीट डॉग्स के इलाज और देखभाल का कार्य करती थी। वह बेघर लोगों के लिए भी एक एनजीओ चलाते थे।


परिवार और राजनीति

प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव पहले समाजवादी पार्टी से जुड़ी थीं, लेकिन 2022 में उन्होंने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। दोनों ने विदेश में पढ़ाई की और 2011 में विवाह किया। हालांकि, उनके वैवाहिक जीवन में कुछ समय के लिए खटास आई थी, लेकिन बाद में स्थिति में सुधार हुआ।


राजनीति से दूरी

अखिलेश यादव के भाई होने के बावजूद, प्रतीक ने राजनीति से दूरी बनाए रखी। उनका मानना था कि उन्हें राजनीति में रुचि नहीं है और वह प्रबंधन के छात्र रहे हैं।