प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ युवा कांग्रेस का आंदोलन तेज
प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली पर युवा कांग्रेस की प्रतिक्रिया
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और प्रशासनिक गलतियों के चलते राजनीतिक हलचल फिर से बढ़ गई है। भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ अपने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है। युवा कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत उनके पद से हटाने की मांग को जोरदार तरीके से दोहराया है। संगठन ने कहा है कि परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने छात्रों के भरोसे को पूरी तरह से हिला दिया है।
युवा कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शनों का एक नया चरण शुरू करेगी, जिसमें मशाल जुलूस, छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम और प्रदर्शन शामिल होंगे।
राज्यों में आंदोलन का विस्तार
संगठन ने बताया कि बार-बार उत्पन्न होने वाले विवादों के कारण छात्रों का शिक्षा प्रणाली पर विश्वास कमजोर हुआ है। भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब इस अभियान का नेतृत्व करने के लिए कई राज्यों का दौरा करेंगे। यह अभियान महाराष्ट्र, तेलंगाना, असम, हरियाणा, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, पंजाब और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चलाया जाएगा.
छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष
भारतीय युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने और प्रशासनिक चूक के कारण छात्रों को लगातार समस्याओं का सामना करना पड़ा है। संगठन ने संदिग्ध संस्थाओं को परीक्षा आयोजित करने के लिए ठेके दिए जाने की खबरों पर भी चिंता जताई है।
युवा कांग्रेस के प्रभारी मनीष शर्मा ने कहा, 'इस देश के छात्रों को रोजगार, न्याय और जवाबदेही का हक है। लेकिन उन्हें प्रश्नपत्र लीक और अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि संगठन तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा जब तक जिम्मेदार लोगों को हटाया नहीं जाता।
चिब ने सरकार पर छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षा में अनियमितताओं के कारण युवा अभ्यर्थियों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा, 'हम इस आंदोलन को पूरे देश में तेज कर रहे हैं और तब तक नहीं रुकेंगे जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने के लिए मजबूर नहीं हो जाते।'
