पोलैंड ने फरवरी में खरीदा 20 टन सोना, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी में बढ़ोतरी

पोलैंड ने फरवरी में 20 टन सोना खरीदा, जिससे उसकी कुल सोने की भंडार 570 टन तक पहुंच गई। इस खरीदारी में अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों की भी भागीदारी रही। जानें कि क्यों केंद्रीय बैंक सोने की खरीदारी को बढ़ा रहे हैं और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
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सोने की खरीदारी में वैश्विक रुचि

दुनिया भर के देशों की नजरें सोने की खरीद पर टिकी हुई हैं। पिछले एक वर्ष में सोने की कीमतों में तेजी आई है, जिससे निवेशकों को अच्छे रिटर्न की उम्मीदें प्रभावित हुई हैं। जनवरी में सोने की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं, जिसके बाद फरवरी में खरीदारी में कमी आई। हालांकि, जब फरवरी में कीमतों में नरमी आई, तो कई केंद्रीय बैंकों ने खरीदारी का लाभ उठाया।


केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का आंकड़ा

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में केंद्रीय बैंकों ने फिर से सोने की खरीदारी शुरू की। जनवरी में गिरावट के बाद, फरवरी में कुल 27 टन सोने की खरीदारी हुई, जो जनवरी के 6 टन से काफी अधिक है। यह लगातार 23वां महीना है जब केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोने के खरीदार बने हैं।


पोलैंड की प्रमुख भूमिका

फरवरी में हुई 27 टन सोने की खरीद में पोलैंड ने सबसे अधिक 20 टन सोना खरीदा। यह पिछले साल फरवरी में की गई 29 टन की खरीदारी के बाद की सबसे बड़ी मासिक खरीद है। अब पोलैंड का सोने का भंडार 570 टन तक पहुंच गया है, जो उसके कुल विदेशी भंडार का 31 प्रतिशत है।


क्यों बढ़ रही है केंद्रीय बैंकों की खरीदारी?

फरवरी में सोने की खरीदारी करने वाले देशों में उज्बेकिस्तान, चीन, मलेशिया और कंबोडिया भी शामिल थे। तुर्की ने 8 टन और रूस ने 6 टन सोने की बिक्री की। केंद्रीय बैंक सोने की खरीदारी को अपने भंडार को मजबूत करने, वैश्विक वित्तीय जोखिमों से बचने और अपनी होल्डिंग्स को विविधता देने के लिए कर रहे हैं।


सोने की कीमतों पर प्रभाव

केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी से सोने की कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है। चीन ने मार्च में भी खरीदारी जारी रखी, जिससे वैश्विक स्तर पर सोने की मांग में मजबूती बनी हुई है। यह स्पष्ट है कि केंद्रीय बैंक सोने को अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।