पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से राजनीतिक हलचल
राजनीतिक प्रतिक्रिया
हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने देश की राजनीतिक स्थिति को गरमा दिया है। कांग्रेस पार्टी ने इस निर्णय पर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है। उनका कहना है कि इस वृद्धि से न केवल आम जनता पर बोझ पड़ेगा, बल्कि देश की आर्थिक विकास दर (GDP) भी प्रभावित होगी। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब मोदी सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय उनसे धन वसूला।
सरकारी तेल कंपनियों ने चार साल के लंबे अंतराल के बाद शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन किया, जिसके तहत दोनों ईंधनों के दाम में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई।
दिल्ली में कीमतों का असर
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है। रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'वर्षों तक जब अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें कम थीं, तब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लगातार यह मांग की कि इसका लाभ उपभोक्ताओं को मिले और गैस, पेट्रोल तथा डीजल की घरेलू कीमतों में कमी की जाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उपभोक्ताओं को लूटा गया।'
महंगाई और विकास दर पर प्रभाव
उन्होंने आगे कहा कि अब जबकि प्रधानमंत्री के करीबी मित्र अमेरिका और इजराइल द्वारा पश्चिम एशिया में युद्ध छेड़ा गया है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, मोदी सरकार ने पहले वाणिज्यिक एलपीजी की कीमतें बढ़ाने के बाद अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी वृद्धि की है। रमेश ने चेतावनी दी कि इससे महंगाई में वृद्धि होगी, जो इस वित्त वर्ष में लगभग छह प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही विकास दर के अनुमान भी काफी कम हो जाएंगे।
