पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि: आम आदमी पर असर

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में भारी वृद्धि हुई है, जिससे आम लोगों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। बेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत 7.41 रुपये और डीजल की कीमत 25.01 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई है। इस वृद्धि का मुख्य कारण मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव के बारे में।
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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि: आम आदमी पर असर

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में एक और बड़ा उछाल आया है। प्राइवेट फ्यूल रिटेल कंपनियों ने दामों में तेजी से वृद्धि की है। शेल इंडिया ने 1 अप्रैल से पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में भारी बढ़ोतरी की है। इससे पहले नायरा एनर्जी भी कीमतें बढ़ा चुकी है। कंपनियों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहने से उन्हें नुकसान हो रहा था, जिसे कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

बेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत में 7.41 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। अब सामान्य पेट्रोल की कीमत 119.85 रुपये और प्रीमियम पेट्रोल 129.85 रुपये प्रति लीटर हो गई है। हालांकि, विभिन्न राज्यों में टैक्स के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है। इस वृद्धि का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा, खासकर उन पर जो रोजाना वाहन का उपयोग करते हैं।

डीजल की कीमत में भी एक झटके में 25.01 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। अब सामान्य डीजल 123.52 रुपये और प्रीमियम डीजल 133.52 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। सूत्रों के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात ऐसे ही बने रहे, तो डीजल की कीमत 148 से 165 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कीमतों में इस तेजी का मुख्य कारण मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है। होर्मुज स्ट्रेट के जरिए भारत में कच्चे तेल की सप्लाई होती है, लेकिन ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के कारण इस रूट पर अनिश्चितता बढ़ गई है। ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।

28 फरवरी के बाद से, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए, तब से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 60% की वृद्धि हो चुकी है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करते हैं। सप्लाई में थोड़ी भी रुकावट कीमतों को तेजी से बढ़ा रही है।

प्राइवेट कंपनियों पर दबाव इसलिए भी अधिक है क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों ने अभी तक खुदरा कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं किया है। सरकारी कंपनियों को नुकसान की भरपाई के लिए कुछ हद तक सहारा मिल जाता है, लेकिन निजी कंपनियों को ऐसा कोई समर्थन नहीं मिलता। इसी कारण उन्हें बढ़ी हुई लागत सीधे ग्राहकों पर डालनी पड़ रही है। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो पेट्रोल-डीजल और महंगे होने की संभावना बनी रहेगी।