पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी: विशेषज्ञों की चेतावनी
कीमतों में वृद्धि का कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी थमने वाली नहीं है, और आने वाले समय में ये और भी बढ़ सकती हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि हाल ही में हुई लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि तेल कंपनियों के भारी घाटे की भरपाई के लिए अपर्याप्त है।
विश्लेषकों की राय
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक सेहुल भट्ट ने एक मीडिया संस्थान को बताया कि हाल की वृद्धि कंपनियों के लाभ को बहाल करने के बजाय उनके बैलेंस शीट के दबाव को कम करने के लिए है। उन्होंने इसे एक नीतिगत स्वीकृति के रूप में देखा है, जिसमें कंपनियों द्वारा झेली गई लागत का असर अंततः कीमतों पर दिखना था।
वाणिज्यिक बैंकिंग कंपनी इक्रा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में की गई बढ़ोतरी मामूली है। उनका अनुमान है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों को खुदरा कीमतों पर पुनर्विचार करना होगा।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब तक ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे स्थिर नहीं होतीं, तब तक कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना बनी रहेगी।
सरकार की रणनीतियाँ
केंद्र सरकार इस ईंधन संकट से निपटने के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपना रही है। रिपोर्ट के अनुसार, एकमुश्त बड़ी बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था और आम जनता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता था, इसलिए सरकार धीरे-धीरे कीमतें बढ़ा रही है।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए, केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क में बड़ी कटौती की है। मार्च में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई थी।
राज्य सरकारों पर वैट कम करने का दबाव भी डाला जा रहा है, खासकर उन राज्यों पर जो अभी भी 30% तक का भारी टैक्स वसूल रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील की है, जिसमें कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की सलाह दी गई है।
हालांकि, भारत सरकार की फिलहाल पेट्रोल और डीजल की राशनिंग करने की कोई योजना नहीं है, लेकिन रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कुछ हद तक राशनिंग की गई है।
