पूर्वोत्तर राज्यों में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सहयोग की आवश्यकता: पेमा खांडू
बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शुक्रवार को मानव तस्करी, ऑनलाइन शोषण, नशीली दवाओं के सेवन, बाल विवाह और सीमा पार की समस्याओं जैसे बच्चों के सामने आने वाले खतरों से निपटने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों के बीच सहयोग को बढ़ाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, खांडू ने यहां आयोजित दो दिवसीय ‘पूर्वोत्तर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ (एनई एससीपीसीआर) सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में इस आयोजन को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के बाल अधिकार निकाय एक साझा मंच पर एकत्र हुए हैं.
कल्याणकारी योजनाओं का महत्व
खांडू ने कहा कि बच्चों का कल्याण सुशासन का असली मापदंड है। किसी भी सरकार की सफलता का मूल्यांकन केवल आर्थिक विकास या बुनियादी ढांचे के निर्माण से नहीं किया जा सकता, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों की सुरक्षा कितनी प्रभावी ढंग से करती है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश की कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि ‘दुलारी कन्या’ योजना के तहत 38 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर 15,500 से ज्यादा लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई है.
सामूहिक प्रयास की आवश्यकता
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए ‘गर्ल्स हेल्थ एंड हाइजीन’ योजना के तहत 25,000 से अधिक लाभार्थियों की सहायता के लिए 3.3 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि तस्करी और डिजिटल शोषण जैसे मुद्दे किसी एक राज्य तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने नागरिक समाज, परिवारों, शिक्षण संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से मिलकर काम करने की अपील की। खांडू ने सम्मेलन में हुई चर्चाओं को क्षेत्र के बच्चों के हित में ठोस परिणामों में बदलने का आग्रह किया.
