पुरी रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ का मुकुट न पहनाना बना विवाद का कारण
पुरी रथयात्रा में विवादास्पद घटना
पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा के दौरान एक अनोखी घटना ने विवाद को जन्म दिया है। भगवान जगन्नाथ को उनके पारंपरिक पुष्प मुकुट 'ताहिया' के बिना ही रथ तक लाया गया, जिससे ओडिशा की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्षी दल, विशेषकर बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस, ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं। यह घटना उस दिन हुई जब भगवान जगन्नाथ को 12वीं सदी के ऐतिहासिक मंदिर से 'पहंडी' रस्म के तहत बाहर लाया जा रहा था। आमतौर पर इस रस्म के दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य पुष्प मुकुट पहनते हैं। लेकिन इस बार भगवान जगन्नाथ बिना मुकुट के नजर आए।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने बताया कि सेवकों ने विग्रह के बाहर आने से पहले बारिश के कारण 'ताहिया' उतार दिया था। विपक्षी दलों ने इस स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए कहा कि रथयात्रा हर साल बारिश के मौसम में होती है, लेकिन इस परंपरा को पहले कभी नजरअंदाज नहीं किया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा, 'भगवान के 'ताहिया' के बिना श्रद्धालुओं के सामने आने से लाखों भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।' बीजद की वरिष्ठ नेता प्रमिला मलिक ने भी राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस चूक के लिए उन्हें करोड़ों भक्तों से माफी मांगनी चाहिए।
राज्य सरकार की जिम्मेदारी
प्रमिला मलिक ने यह भी कहा कि पुरी का जगन्नाथ मंदिर ओडिशा सरकार के विधि विभाग के अधीन आता है, इसलिए इस बड़ी चूक के लिए राज्य सरकार को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। इस पारंपरिक चूक ने न केवल भक्तों को निराश किया है, बल्कि राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद भी उत्पन्न कर दिया है।
