पुणे के विकास में स्थानीय नेताओं की विफलता पर अजित पवार की टिप्पणी
पुणे के विकास में कमी पर अजित पवार की चिंता
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने यह आरोप लगाया है कि पुणे को केंद्र और राज्य से पर्याप्त वित्तीय सहायता मिली है, लेकिन स्थानीय नेताओं ने इसका उपयोग शहर के विकास के लिए नहीं किया।
रविवार को बनेर क्षेत्र में एक रैली के दौरान पवार ने कहा कि इस 'विफलता' ने शहर के नेतृत्व में बदलाव की आवश्यकता को स्पष्ट किया है।
पवार की पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना, राज्य में महायुति गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन पीएमसी सहित 29 नगर निगमों में अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं।
पानी की कमी, कूड़े के ढेर, सड़कों पर गड्ढे, भारी यातायात और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए पवार ने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है।
उन्होंने कहा, 'हम कोयता गैंग को समाप्त करना चाहते हैं और शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहते हैं। केंद्र और राज्य में हम महायुति का हिस्सा हैं, लेकिन पुणे और पिंपरी चिंचवड की स्थिति अलग है। पीएमसी के प्रशासक इसके लिए जिम्मेदार हैं।'
कोयता गैंग, जो महाराष्ट्र के पुणे और लातूर जैसे शहरों में सक्रिय है, एक हिंसक आपराधिक गिरोह है, जिसके सदस्य आपराधिक गतिविधियों में दरांती का उपयोग करते हैं।
पवार ने यह भी कहा कि वह पुणे के संरक्षक मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'नगर निगम के पास अलग शक्तियां हैं। केंद्र और राज्य ने बड़ी राशि दी है लेकिन प्रशासक असफल रहे हैं।'
