पीलीभीत में करोड़पति चपरासी का बड़ा घोटाला: तीन पत्नियों से छुपाए राज़

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक चपरासी ने सरकारी धन का बड़ा घोटाला किया है, जिसमें उसने अपनी तीन पत्नियों को भी अंधेरे में रखा। इस मामले में पुलिस ने कई गिरफ्तारियां की हैं और जांच में कई संदिग्ध बैंक खातों का पता लगाया है। जानिए कैसे खुला यह राज़ और क्या हैं इसके पीछे की कहानी।
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पीलीभीत में चपरासी का महाघोटाला

पीलीभीत का करोड़पति चपरासी: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक ऐसा घोटाला सामने आया है जिसने सरकारी सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस महाघोटाले का मुख्य पात्र जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में कार्यरत चपरासी इल्हाम-उर्र-रहमान शम्सी है, जिसने न केवल सरकारी धन की हेराफेरी की, बल्कि अपनी तीन पत्नियों को भी अंधेरे में रखा। यह जानकर हैरानी होती है कि इल्हाम की तीनों पत्नियों को यह तक नहीं पता था कि उनका पति पहले से शादीशुदा है और उनकी दो और पत्नियां भी हैं।

पीलीभीत में करोड़पति चपरासी का बड़ा घोटाला: तीन पत्नियों से छुपाए राज़
पीलीभीत के करोड़पति चपरासी पर एक और खुलासा, तीनों बीवियों से छुपा रखा था ये खुफिया राज

पुलिस की जांच में यह सामने आया कि आरोपी चपरासी ने चालाकी से सैलरी टोकन जनरेट करने का काम अपने हाथ में ले लिया था। उसने अपनी तीनों पत्नियों, सास, साली और अन्य रिश्तेदारों को कागजों पर ‘टीचर’ और ‘बाबू’ बना दिया। पिछले 8 वर्षों में उसने कुल 8 करोड़ 15 लाख रुपये इन रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किए।

शुक्रवार को पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जिनमें आरोपी की पत्नियां लुबना और अजारा खान, साली फातिमा और सास नाहिद शामिल हैं।

कैसे हुआ खुलासा?

घोटाले का पर्दाफाश फरवरी 2026 में हुआ जब बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर ने डीएम को पत्र लिखकर बताया कि ट्रेजरी से एक निजी खाते में 1.15 करोड़ रुपये भेजे गए हैं। जांच शुरू होने पर मास्टरमाइंड चपरासी का नाम सामने आया। पुलिस ने अब तक 53 संदिग्ध बैंक खातों का पता लगाया है और लगभग 5.50 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए हैं।

तीन पत्नियों का अज्ञानता

इल्हाम की पहली पत्नी अर्शी खातून पहले ही जेल जा चुकी है। दूसरी पत्नी अजारा खान ने पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा किया कि उसे इल्हाम की अन्य शादियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। आरोपी ने हर पत्नी को अलग शहर में रखा था और उन्हें ऐशो-आराम की जिंदगी देने के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल कर रहा था।