पीलीभीत के चपरासी ने 8 करोड़ रुपये का घोटाला किया, तीन पत्नियों के साथ जी रहा था लग्जरी जीवन

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक चपरासी ने अपनी चतुराई से शिक्षा विभाग में 8 करोड़ रुपये का घोटाला किया। उसने फर्जी शिक्षकों के नाम पर पैसे निकालकर अपने परिवार और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किए। इस घोटाले में उसकी तीन पत्नियों और अन्य रिश्तेदारों का भी नाम शामिल है। जब बैंक के एक मैनेजर ने संदिग्ध लेनदेन की सूचना दी, तो पुलिस ने जांच शुरू की, जिससे यह मामला उजागर हुआ। अब पुलिस ने कई गिरफ्तारियां की हैं और मुख्य आरोपी की जमानत रद्द कराने की तैयारी कर रही है।
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पीलीभीत में चपरासी का बड़ा घोटाला

पीलीभीत समाचार: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक क्षेत्र में एक चपरासी की चर्चा जोरों पर है, जिसने अपनी चतुराई से शिक्षा विभाग और ट्रेजरी प्रणाली को संकट में डाल दिया है। पीलीभीत के DIOS कार्यालय में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम-उर्र-रहमान शम्सी ने भ्रष्टाचार की एक ऐसी कहानी लिखी है, जिसने सरकारी सुरक्षा तंत्र की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। इल्हाम की आधिकारिक तैनाती बीसलपुर के एक इंटर कॉलेज में थी, लेकिन उसने अपनी प्रभावशाली स्थिति का लाभ उठाते हुए 8 साल पहले जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में अटैचमेंट प्राप्त कर लिया। यहां उसने ट्रेजरी के कार्यों और वेतन बिल पास करने की प्रक्रिया को बारीकी से समझा।


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इल्हाम ने देखा कि सिस्टम में कुछ खामियां हैं जिनका फायदा उठाया जा सकता है। उसने फर्जी ‘बेनेफिशियरी आईडी’ बनाना शुरू किया और अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को फर्जी शिक्षक और बाबू के रूप में दर्शाया। इसके बाद, वह खुद ही सैलरी के टोकन जनरेट करता और सरकारी धन को सीधे अपने करीबी लोगों के खातों में ट्रांसफर कर देता। यह खेल 2018 के आसपास शुरू हुआ और फरवरी 2026 तक बिना किसी डर के चलता रहा।


रिश्तेदारों के खातों में करोड़ों की हेराफेरी


जांच के दौरान जब पुलिस ने इल्हाम के सिंडिकेट के बैंक खातों की जांच की, तो अधिकारियों को बड़ा झटका लगा। इल्हाम ने अपनी तीन पत्नियों, सास, साली और अन्य परिचितों के खातों में करोड़ों रुपये भेजे थे। कुल मिलाकर 53 संदिग्ध खातों के माध्यम से 8.15 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। यह धन वेतन और स्कूलों के फर्जी निर्माण कार्यों के नाम पर निकाला गया था।


नाम और रिश्ता प्राप्त धनराशि (लगभग)
लुबना (पत्नी) 2.37 करोड़ रुपये
अजारा खान (पत्नी) 2.12 करोड़ रुपये
अर्शी खातून (पहली पत्नी) 1.15 करोड़ रुपये
परवीन व आशकारा (परिचित) 86.55 लाख रुपये
फातिमा नवी (साली) 1.03 करोड़ रुपये
नाहिद (सास)आफिया (रिश्तेदार) 95.28 लाख रुपये
आफिया (रिश्तेदार) 80.68 लाख रुपये


तीन पत्नियों के साथ लग्जरी जीवन


इल्हाम की कहानी केवल आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक धोखे की भी एक मिसाल है। उसने तीन शादियां की थीं- पहली अर्शी, दूसरी अजारा और तीसरी लुबना। चौंकाने वाली बात यह है कि तीनों पत्नियां अलग-अलग शहरों में रहती थीं और उन्हें एक-दूसरे के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।


इल्हाम ने खुद को एक धनी व्यवसायी या प्रभावशाली अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया। वह अपनी पत्नियों और प्रेमिकाओं को महंगे फ्लैट, जमीन और लग्जरी गाड़ियां उपहार में देता था। उसकी एक पत्नी बुलंदशहर की थी जबकि दूसरी संभल की, लेकिन उसने अपनी चतुराई से सभी को अलग-अलग ‘हैप्पी होम’ का अहसास कराया। जब पुलिस ने दूसरी पत्नी अजारा खान से पूछताछ की, तो उसने स्पष्ट कहा, “मुझे नहीं पता था कि उसकी कोई और बीवी भी है।”


भंडाफोड़: एक चिट्ठी ने खेल बिगाड़ा


इल्हाम का साम्राज्य तब ढह गया जब फरवरी 2026 में बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर को एक संदिग्ध लेनदेन का पता चला। ट्रेजरी से एक ही बार में 1.15 करोड़ रुपये एक निजी खाते (अर्शी खातून) में भेजे गए थे। मैनेजर ने तुरंत इसकी सूचना पीलीभीत के डीएम ज्ञानेंद्र सिंह को दी।


डीएम ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया, जिसने मामले की तहकीकात शुरू की। जांच में पता चला कि पिछले 8 वर्षों से DIOS कार्यालय के कंप्यूटर से फर्जी शिक्षकों के नाम पर बिल बनाए जा रहे थे। जैसे ही इल्हाम का नाम मास्टरमाइंड के रूप में सामने आया, विभाग में हड़कंप मच गया।


कानूनी कार्रवाई और पुलिस का अगला कदम


पीलीभीत पुलिस ने अब तक इल्हाम की दो पत्नियों, सास और साली समेत 7 महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उसकी पहली पत्नी अर्शी पहले ही जेल जा चुकी है। पुलिस ने विभिन्न खातों में जमा 5.50 करोड़ रुपये को फ्रीज कर दिया है। हालांकि, मुख्य आरोपी इल्हाम ने 30 मार्च को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली थी, लेकिन पुलिस अब उस जमानत को निरस्त कराने और गबन की पूरी राशि वसूलने की तैयारी कर रही है।


एएसपी विक्रम दहिया के अनुसार, “यह एक सुनियोजित वित्तीय अपराध है। हम इस नेटवर्क में शामिल शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों और बाबुओं की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं, क्योंकि बिना मिलीभगत के एक चपरासी इतना बड़ा घोटाला अकेले नहीं कर सकता।”